आत्मचिंतन और साधना का विशेष काल है चातुर्मास
अंबाह में इन दिनों चातुर्मास के पावन अवसर पर धार्मिक आयोजनों का सिलसिला जारी है। स्थानीय जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए संगममति माताजी ने कहा कि चातुर्मास महज धार्मिक कर्मकांडों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन, स्वाध्याय और साधना के जरिए जीवन को उचित मार्ग दिखाने वाला स्वर्णिम काल है।
माताजी ने अपने प्रवचन में इस बात पर जोर दिया कि मनुष्य को अपने मन, वचन और पवित्र कर्मों की शुद्धि पर विशेष ध्यान देना चाहिए। दैनिक जीवन में संयम, त्याग और सदाचार को उतारने से ही जीवन सार्थक बनता है।
श्री आदिनाथ महिला मंडल द्वारा धार्मिक अनुष्ठान
चातुर्मास के विशेष कार्यक्रमों की श्रृंखला में गुरुवार को श्री आदिनाथ महिला मंडल की ओर से कई धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इस दौरान महिलाओं ने पूरी तन्मयता के साथ सामूहिक रूप से णमोकार महामंत्र और भक्तामर स्तोत्र का पाठ किया।
मन, वचन और कर्म की शुद्धि के साथ संयम, त्याग और सदाचार को अपनाना ही चातुर्मास का वास्तविक उद्देश्य है।
पाठ के उपरांत उपस्थित श्रद्धालुओं ने मिलकर पंच परमेष्ठी की आरती की। कार्यक्रम का वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय नजर आया और बड़ी संख्या में स्थानीय जैन समाज के लोग इस आयोजन का हिस्सा बने।
शोभायात्रा के साथ हुआ स्वागत
गुरुवार को आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम से पहले श्री संगममति माताजी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। माताजी को इसी शोभायात्रा के साथ मुख्य आयोजन स्थल तक लाया गया, जहां श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!