अंबाह क्षेत्र में प्रशासनिक दावों और मैदानी हकीकत के बीच का अंतर एक बार फिर सामने आया है। दिहाड़ी न मिलने और भूख से परेशान एक मजदूर अपनी फरियाद लेकर सीधे नगर पालिका कार्यालय पहुंच गया। मजदूर का दर्द था कि उसे निर्धारित दर पर भोजन तक नसीब नहीं हो रहा है।

मजदूर सतीश सिंह की दर्दभरी दास्तान

पीड़ित मजदूर सतीश सिंह ने अपनी स्थिति बयां करते हुए बताया कि प्रदेश के अन्य हिस्सों में गरीबों के लिए पांच रुपये में भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन अंबाह में संचालित होने वाली दीनदयाल रसोई योजना महज शुरुआती कुछ दिनों के बाद से ही पूरी तरह से बंद पड़ी हुई है। लगातार हो रही बारिश की वजह से उसे उस दिन कोई दिहाड़ी मजदूरी भी नहीं मिल पाई थी, जिसके चलते नौबत भुखमरी तक आ गई थी।

बंद पड़ी रसोई और मोबाइल पर आ रहे संदेश

स्थानीय निवासी कन्हैया लाल तोमर के साथ भी एक अजीब वाकया सामने आया है। उन्हें अपने मोबाइल फोन पर पांच रुपये में भोजन मिलने का संदेश प्राप्त हुआ, जबकि हकीकत यह है कि रसोई के ताले महीनों से नहीं खुले हैं। इस तकनीकी गफलत और व्यवस्था की लाचारी से परेशान होकर उन्होंने नगर पालिका में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।

प्रशासनिक सफाई और टेंडर प्रक्रिया

इस पूरे मामले पर नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) शारिब कौसर का पक्ष भी सामने आया है। उनका कहना है कि इस रसोई के संचालन के लिए अब तक दो बार टेंडर प्रक्रिया अपनाई जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद संचालन शुरू नहीं हो सका है। उन्होंने जल्द ही इसे दोबारा सुचारू रूप से शुरू करवाने का भरोसा दिलाया है, हालांकि हितग्राहियों को गलत संदेश पहुंचने के मसले पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।