मुरैना जिले के सबलगढ़ अंचल में इस वर्ष मानसून की बेरुखी साफ दिख रही है। वर्षा ऋतु में भी यहां बहुत कम बारिश हुई है, जिसके चलते पूरे इलाके में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो गई है। किसान अपनी खड़ी फसलों को बचाने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं, वहीं भूजल स्तर में भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सबलगढ़ को सामान्य रूप से 200 मिलीमीटर वर्षा की आवश्यकता होती है। हालांकि, 14 जुलाई तक यहां केवल 82 मिलीमीटर बारिश ही रिकॉर्ड की जा सकी है, जो कि सामान्य से बहुत कम है। पिछले वर्ष इसी समय तक क्षेत्र में 376 मिलीमीटर वर्षा हो चुकी थी, जिससे मौजूदा स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

तालाबों का सूखना और फसलों पर गहराता संकट

बारिश की कमी के कारण सबलगढ़ का प्रमुख तालाब भी पूरी तरह सूख गया है। गौरतलब है कि इस तालाब को लगभग 12 साल पहले जलस्तर बनाए रखने के उद्देश्य से पुनर्जीवित किया गया था। अब किसान अपनी ज्वार-बाजरा और धान जैसी महत्वपूर्ण फसलों को सूखने से बचाने के लिए महंगे समरसिबल पंपों का उपयोग करने को विवश हैं।

किसानों की गुहार: नहरों से पानी और सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग

क्षेत्र के किसानों ने प्रशासन से धान की फसल के लिए तत्काल नहरों से पानी छोड़ने की अपील की है। विभिन्न किसान संगठनों ने मुरैना जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग भी उठाई है। किसान छत्तू रजक ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि जंगल में पानी की कमी के कारण उन्हें अपने पशुओं को दूर तालाबों तक ले जाना पड़ रहा है। वहीं, किसान विश्राम का कहना है कि जुलाई का महीना होने के बावजूद तालाब खाली पड़े हैं, फसलें मुरझाने लगी हैं और भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है।

पूरे जिले में अब तक सिर्फ 23 प्रतिशत ही बारिश दर्ज की गई है, जिसके परिणामस्वरूप पानी की 89 प्रतिशत कमी बनी हुई है। हालांकि, मौसम विभाग ने 15 अगस्त तक अच्छी बारिश की संभावना जताई है, जिससे उम्मीद है कि जलस्तर में कुछ सुधार हो सकता है और किसानों को थोड़ी राहत मिल सकती है।