ग्वालियर-चंबल संभाग के मुरैना जिले में स्वास्थ्य और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की पोल खुलती नजर आ रही है। जिले में जरूरतमंद मरीजों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के लिए कुल 52 सरकारी 108 एंबुलेंस संचालित होने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। मौजूदा समय में जिले के विभिन्न क्षेत्रों की करीब 15 एंबुलेंस पिछले 7 से 10 दिनों से सेवा से पूरी तरह बाहर चल रही हैं।
ग्वालियर ट्रांसपोर्ट नगर में खड़ी हैं कई गाड़ियां
मिली जानकारी के अनुसार, प्रशासनिक दावों के उलट मुरैना जिले की कई महत्वपूर्ण एंबुलेंस इस समय ग्वालियर के ट्रांसपोर्ट नगर में खड़ी धूल फांक रही हैं। इनमें अकेले कैलारस क्षेत्र की 4, पहाड़गढ़ की 2 एंबुलेंस के अलावा जौरा, देवगढ़, गलेथा और तिलावली क्षेत्र की गाड़ियां शामिल हैं। इन वाहनों के लंबे समय से सेवा से बाहर रहने के कारण स्थानीय स्तर पर आपातकालीन परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है।
कैलारस में एक भी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं, मरीजों की बढ़ी मुश्किलें
कैलारस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की स्थिति सबसे ज्यादा दयनीय बनी हुई है। यहां आधिकारिक तौर पर दो बीएलएस और दो जननी एक्सप्रेस एंबुलेंस आवंटित हैं, लेकिन पिछले करीब 10 दिनों से इनमें से एक भी वाहन मौके पर उपलब्ध नहीं है। इस संबंध में बीएमओ डॉ. मनीष शर्मा का कहना है कि जिला 108 प्रभारी को कई बार नई एंबुलेंस उपलब्ध कराने के लिए कहा जा चुका है। वाहन न मिलने के कारण सड़क दुर्घटनाओं के घायलों और प्रसूताओं को तुरंत हायर सेंटर रेफर करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मरीजों को चुकानी पड़ रही है अपनी जेब से भारी कीमत
सरकारी एंबुलेंस की इस नाकामी का खामियाजा सीधे तौर पर आम जनता को अपनी जेब ढीली करके भुगतना पड़ रहा है। कैलारस निवासी महेंद्र धाकड़ ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि 23 जुलाई को उनकी बेटी निशा के पेट में अचानक तेज दर्द उठा था। उन्होंने 108 पर संपर्क किया लेकिन कोई गाड़ी नहीं पहुंची, जिसके बाद उन्हें मजबूरन दो हजार रुपए खर्च कर निजी एंबुलेंस से बेटी को जिला अस्पताल पहुंचाना पड़ा। इसी तरह देवकच्छ खीरी निवासी उत्तम आदिवासी के बेटे को 25 जुलाई को सड़क हादसे में गंभीर चोटें आईं, जिन्हें भी सरकारी मदद न मिलने पर निजी वाहन से अस्पताल ले जाना पड़ा।
गौरतलब है कि पिछले महीने जिला अस्पताल में तीन एंबुलेंस के औचक निरीक्षण के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। उस समय सभी 52 एंबुलेंस का ऑडिट कराने और संबंधित एजेंसी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक ऑडिट का काम पूरा नहीं हो सका है। इस पूरे मामले पर जब प्रतिक्रिया जानने के लिए सीएमएचओ डॉ. पद्मेश उपाध्याय से संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं, 108 एंबुलेंस प्रभारी राहुल सगर ने स्वीकार किया कि वाहनों की संख्या कम होने से दिक्कतें आई हैं और भोपाल के उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी दे दी गई है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!