निर्धारित समय पर नहीं पहुंचे जिला कलेक्टर

मुरैना जिले के सबलगढ़ स्थित जनपद पंचायत कार्यालय के सभागार में मंगलवार को स्थानीय नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए जनसुनवाई का आयोजन किया गया था। इस तय कार्यक्रम में जिला कलेक्टर लोकेश जांगिड़ की उपस्थिति दोपहर तीन बजे तक निर्धारित की गई थी, लेकिन उनके न पहुंचने के कारण कई लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा।

अधिकारियों को मिले 146 आवेदन, सरपंच भी पहुंचे

कलेक्टर की गैरमौजूदगी के बावजूद जनपद पंचायत सीईओ ललित चौधरी और नायब तहसीलदार के समक्ष कुल 146 आवेदन पहुंचे। इनमें ग्रामीण इलाकों से आए किसानों और गरीबों के अलावा विभिन्न पंचायतों के कई सरपंच भी शामिल थे, जो अपनी क्षेत्रीय समस्याओं के निवारण के लिए पहुंचे थे। बड़े अधिकारी के न होने से आम जनता में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर निराशा देखी गई।

आवास सूची से नाम काटने पर रिश्वत के आरोप

इस दौरान कई गंभीर शिकायतें भी अधिकारियों के सामने रखी गईं। ग्राम पंचायत कुतघान के ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों की सूची से नाम काटे जाने की जांच करने पहुंचे जनपद कर्मचारी द्वारिका प्रसाद शर्मा ने तीन-तीन हजार रुपये की मांग की। हालांकि, आरोपी कर्मचारी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कुछ लोग भूसे से भरे हुए मकानों को अपना निवास बता रहे थे।

इसके अलावा अन्य ग्रामीण क्षेत्रों से भी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं सामने आईं। ग्राम पंचायत जारौली के मुख्य मार्ग पर कीचड़ के कारण लोगों का आना-जाना मुश्किल हो रहा है। वहीं ग्राम पंचायत अटार में सड़क के दोनों तरफ अतिक्रमण होने से घरों का गंदा पानी बाहर निकलने में भारी परेशानी हो रही है।

ग्राम पंचायत खेरला में आंगनवाड़ी भवन के निर्माण स्थल पर अवैध कब्जे का मामला भी जनसुनवाई में उठाया गया। जनपद सीईओ ललित चौधरी ने बताया कि कलेक्टर लोकेश जांगिड़ को तय कार्यक्रम के अनुसार आना था, लेकिन किन्हीं अपरिहार्य कारणों से वे नहीं आ सके। उन्होंने स्वीकार किया कि शीर्ष अधिकारी की मौजूदगी से समस्याओं का समाधान और तेजी से हो पाता है।