सबलगढ़ क्षेत्र में श्री मुरली मनोहर राम-जानकी मंदिर से सटी सरकारी औकाफ की जमीन पर अतिक्रमण का मामला लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है। मंदिर के पुजारी घनश्याम देव शर्मा ने उपखंड अधिकारी (एसडीएम) से इस जमीन को खाली कराने की गुहार लगाई है। उनका आरोप है कि वे पिछले 12 वर्षों से इस संबंध में शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला है।

पुजारी को सरकारी सहायता का अभाव

पुजारी घनश्याम देव शर्मा ने बताया कि मंदिर की जमीन सरकारी होने के कारण उन्हें सरकार से नियमित राशि नहीं मिलती। साथ ही, मंदिर की प्रसिद्धि कम होने के कारण श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ावे से होने वाली आय भी पूजा-पाठ के खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसी आर्थिक तंगी के चलते वे लंबे समय से अतिक्रमण हटाने की मांग कर रहे हैं।

कमिश्नर के आदेश के बाद भी सुस्ती

मामले की गंभीरता को देखते हुए, मुरैना संभाग के कमिश्नर ने 22 जून को एक पत्र जारी कर एसडीएम को मंदिर की जमीन से अतिक्रमण हटाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। कमिश्नर ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया था कि सरकारी मंदिरों की जमीन की सुरक्षा करना और अवैध कब्जों को हटाना राजस्व अधिकारियों का कर्तव्य है। उन्होंने एसडीएम को मौके पर जाकर जांच करने और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देने को कहा था। इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

जमानत का वादा भी अधूरा

पुजारी ने यह भी बताया कि पिछले दिसंबर में अतिक्रमण से जुड़े एक मामले में कुछ लोगों को जेल भेजा गया था। उन्होंने जमानत के दौरान 45 दिनों के भीतर जमीन खाली करने का वादा किया था, जिसके आधार पर उन्हें रिहा किया गया था। लेकिन, लगभग पांच महीने बीत जाने के बाद भी अतिक्रमण जस का तस बना हुआ है।

लगातार कार्रवाई न होने पर पुजारी ने एक बार फिर कमिश्नर से शिकायत की। इसके बाद कमिश्नर ने एसडीएम को पुनः कार्रवाई के निर्देश जारी किए। एसडीएम मेघा तिवारी ने व्हाट्सएप के माध्यम से सूचित किया है कि इस मामले में दोबारा वारंट जारी किया जाएगा।