ग्वालियर स्थित मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित एक बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति वैवाहिक या पारिवारिक विवाद से जुड़े आपराधिक मामले में समझौते के बाद अदालत से बरी हो जाता है, तो उसे केवल उन पुराने मुकदमों के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।
उच्च न्यायालय ने पुलिस विभाग द्वारा अनुकंपा नियुक्ति से इनकार करने वाले तीनों आदेशों को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही, याचिकाकर्ता राघवेंद्र तोमर को आरक्षक पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया दो महीने के भीतर पूरी कर नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत की एकलपीठ द्वारा की गई। याचिकाकर्ता राघवेंद्र तोमर के पिता, राजकुमार सिंह तोमर, मध्य प्रदेश पुलिस में सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) के पद पर कार्यरत थे। सेवाकाल के दौरान उनके निधन के बाद, राघवेंद्र ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था।
पुलिस विभाग ने राघवेंद्र का आवेदन यह कहते हुए अस्वीकृत कर दिया था कि उनके विरुद्ध दो आपराधिक प्रकरण दर्ज थे, जिसके कारण वे अनुकंपा नियुक्ति के लिए योग्य नहीं माने गए।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह बताया गया कि राघवेंद्र ने अपने आवेदन और चरित्र सत्यापन प्रपत्र में अपने विरुद्ध दर्ज दोनों आपराधिक मामलों की जानकारी शपथपत्र के माध्यम से स्वयं ही प्रदान की थी। उन्होंने किसी भी तथ्य को छिपाया नहीं था।
बाद में, ये दोनों मामले पारिवारिक विवाद से संबंधित होने के कारण समझौते के आधार पर न्यायालय में समाप्त हो गए और राघवेंद्र दोनों ही प्रकरणों में बरी हो गए। इसके बावजूद, पुलिस विभाग ने अपने पूर्व के निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया और अनुकंपा नियुक्ति देने से लगातार इनकार करता रहा।
उच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ
उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि जब दोनों आपराधिक मामले पारिवारिक विवाद से संबंधित थे और याचिकाकर्ता समझौते के बाद विधिवत रूप से बरी हो चुका है, तो केवल उन पुराने मामलों के आधार पर उसे सरकारी सेवा से वंचित करना उचित नहीं है। अदालत ने यह भी स्वीकार किया कि याचिकाकर्ता ने अपने विरुद्ध दर्ज मामलों की जानकारी को छिपाया नहीं था, बल्कि स्वयं ही विभाग को इससे अवगत कराया था। इन परिस्थितियों को देखते हुए, पुलिस विभाग द्वारा नियुक्ति से इनकार करना न्यायसंगत नहीं था।
दो माह में नियुक्ति के निर्देश
अदालत ने पुलिस विभाग द्वारा जारी किए गए सभी संबंधित आदेशों को निरस्त करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राघवेंद्र तोमर को आरक्षक पद पर अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया दो महीने के भीतर पूरी की जाए और उन्हें नियुक्ति पत्र जारी किया जाए।





टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!