ग्वालियर में भारतीय युवा कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे देशव्यापी अभियान 'छात्रों की गूंज' के अंतर्गत रविवार शाम को एक विशेष अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। शहर के पंद्रह विधानसभा क्षेत्रों में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, युवा और साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।
शिक्षा और रोज़गार पर गंभीर चिंताएँ
इस सम्मेलन में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कवियों ने अपनी ओजपूर्ण और व्यंग्यात्मक कविताओं के ज़रिए वर्तमान शिक्षा प्रणाली, प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे प्रश्नपत्र लीक के मामलों, बढ़ती बेरोज़गारी और छात्रों के भविष्य से जुड़ी चिंताओं को प्रमुखता से उठाया। उनकी रचनाओं में सामाजिक सरोकार भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिए।
वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि देशभर में बार-बार हो रही प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने लाखों मेहनती विद्यार्थियों का भरोसा तोड़ा है। वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद जब परीक्षा प्रक्रिया पर ही सवाल उठने लगते हैं, तो यह छात्रों के मनोबल और उनके भविष्य दोनों पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डालता है। कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कविताओं में व्यक्त हुई छात्रों की पीड़ा
उत्तर प्रदेश के एटा से पधारीं कवयित्री योगिता चौहान ने अपनी सशक्त कविता के ज़रिए मौजूदा परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए कहा:
देश में ये कैसा मातम छा रहा है। किस दिशा से ये अंधेरा आ रहा है। क्यों घिनौने खेल सत्ता खेलती है। साजिशें तो सिर्फ जनता झेलती है। कितने छात्रों का जनाजा जा रहा है। किस दिशा में देश जा रहा है।
वहीं, रीवा से आए कवि अमित शुक्ला ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के गंभीर मुद्दे को अपनी कविता में प्रमुखता से उठाते हुए मार्मिक सवाल किया:
नीट परीक्षा लीक होने से जो बच्चे फांसी पर झूल गए, तुम ही बताओ उन बच्चों का हत्यारा कौन है?
इस कवि सम्मेलन में औरैया के कवि अजय अंजाम, राजस्थान के कोटा से अर्जुन अल्लड़, मुरैना के अरविंद पोटा और हेमंत शर्मा जैसे अन्य कवियों ने भी अपनी रचनाओं के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था की कमियों, छात्रों की समस्याओं, बेरोज़गारी और केंद्र सरकार की नीतियों पर अपने विचार व्यक्त किए।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!