शहर में बारिश का मौसम शुरू होने से पहले ही सड़कों की हालत चिंताजनक बनी हुई है। निगम द्वारा किए जा रहे गड्ढा रिपेयरिंग के काम में लापरवाही के चलते आए दिन वाहन चालक चोटिल हो रहे हैं। शहर की सबसे खराब सड़कों में से एक शिंदे की छावनी रोड पर मंगलवार को गड्ढे इतने गहरे हो गए कि लैंड रिकॉर्ड के उपायुक्त की बुलेरो गाड़ी उसमें फंस गई। गनीमत रही कि गाड़ी की रफ्तार कम थी, अन्यथा वह पलट सकती थी।
इसी तरह बसंत विहार की सड़क, जिस पर कुछ दिनों पहले ही डामर बिछाया गया था, वह भी दो जगहों से धंस गई है। पिछले साल इसी सड़क की बदहाली के कारण निगम को देशभर में किरकिरी झेलनी पड़ी थी। इस बार भी बारिश में इसके फिर से धंसने का अंदेशा जताया जा रहा है।
विभिन्न एजेंसियों की लापरवाही
शहर में सड़कों का निर्माण केवल नगर निगम ही नहीं कर रहा है। लोक निर्माण विभाग, ग्वालियर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कार्पोरेशन और एमपीआरडी जैसी संस्थाएं भी सड़कें बना रही हैं। देखरेख के अभाव में इन सड़कों की हालत लगातार खराब होती जा रही है।
जनहित याचिका और निगम का जवाब
शहर की जर्जर सड़कों को लेकर हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई चल रही है। याचिकाकर्ता कैलाश चंद अग्रवाल ने विशेष रूप से जेएएच अस्पताल तक पहुंचने वाले मार्गों की बदहाली का मुद्दा उठाया है, जहां गड्ढों और निर्माण कार्यों के कारण एंबुलेंस तक फंस जाती हैं, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ जाती है।
इसके जवाब में नगर निगम ने हाईकोर्ट में अपनी अनुपालन रिपोर्ट पेश की, जिसमें उसने समस्या को केवल कुलदीप नर्सरी से एजी ऑफिस मार्ग तक सीमित बताया। निगम ने दावा किया कि कुलदीप नर्सरी से विवेकानंद चौराहे तक सड़क बन चुकी है, जबकि आगे का काम पीडब्ल्यूडी द्वारा किया जा रहा है। याचिका में पूरे शहर की सड़कों की समस्या उठाई गई थी, लेकिन निगम के जवाब में जेएएच अस्पताल मार्ग और अन्य खराब सड़कों का जिक्र न होने से उसके जवाब पर सवाल खड़े हो गए हैं।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!