आठ साल पुराने वैवाहिक विवाद का हुआ सुखद समाधान

ग्वालियर में न्याय के गलियारों से एक सकारात्मक और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। यहाँ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ में पिछले आठ वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे एक मूक-बधिर पति-पत्नी का घरेलू विवाद आखिरकार सुलझ गया है। मध्यस्थता के जरिए दोनों के बीच के गिले-शिकवे दूर हुए और उन्होंने एक बार फिर से साथ जीवन बिताने का निर्णय लिया।

विशेषज्ञों की मदद से कराई गई थी सफल काउंसिलिंग

पूश्री और दीपक गुप्ता नामक इस दंपती के बीच संवाद की कमी और अन्य कारणों से लंबे समय से मनमुटाव चल रहा था। मामले की गंभीरता को समझते हुए मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने इस पर विशेष ध्यान दिया। सांकेतिक भाषा के विशेषज्ञों और प्रशिक्षित मूक-बधिर मध्यस्थों की सहायता से दोनों की काउंसलिंग कराई गई, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए और आपसी सहमति से सारे मतभेद समाप्त हो गए।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने किया 'इशारा कैफे' का उद्घाटन

विवाद खत्म होने के बाद विधिक सेवा प्राधिकरण ने इस जोड़े को आर्थिक संबल प्रदान करने का बीड़ा उठाया। इसी कड़ी में हाईकोर्ट परिसर के भीतर 'इशारा कैफे' की स्थापना की गई। वीरवार को आयोजित एक गरिमापूर्ण समारोह में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति विवेक रूसिया ने रिबन काटकर इस कैफे का औपचारिक शुभारंभ किया।

यह अनूठी पहल दिव्यांगजनों और मूक-बधिरों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने तथा उन्हें सम्मानजनक आजीविका कमाने का अवसर देने का एक बेहतरीन माध्यम है।

इस उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक न्यायाधिपति जीएस अहलूवालिया सहित उच्च न्यायालय के तमाम अन्य न्यायाधीश मौजूद रहे। साथ ही प्रधान जिला न्यायाधीश ललित किशोर, कलेक्टर रुचिका चौहान, एसएसपी धर्मवीर सिंह, विभिन्न न्यायिक व प्रशासनिक अधिकारी और अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी भी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।

प्रशासन और न्यायपालिका के इस सहयोगात्मक कदम से अब पूश्री और दीपक गुप्ता को अपने पैरों पर खड़े होने का नया जरिया मिल गया है। यह कैफे न केवल उन्हें रोजगार प्रदान करेगा, बल्कि ग्वालियर-चंबल अंचल में सामाजिक न्याय और पुनर्वास का एक अनूठा उदाहरण भी पेश कर रहा है।