अंचल के सबसे बड़े शहर ग्वालियर में मरीजों की जान से किस तरह खिलवाड़ किया जा रहा है, इसका खुलासा शनिवार को हुई एक औचक जांच में हुआ। शहर के विभिन्न अस्पतालों के बाहर मरीजों को लाने-ले जाने के लिए खड़ी की जाने वाली कई एंबुलेंस असल में खुद ही खटारा हालत में बिना वैध दस्तावेजों के सड़कों पर दौड़ रही थीं।
कलेक्टर के निर्देश पर हुई ताबड़तोड़ कार्रवाई
जिला कलेक्टर रुचिका चौहान के सख्त निर्देशों के बाद परिवहन विभाग की एक विशेष टीम ने शहर के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों का रुख किया। इस औचक निरीक्षण की भनक लगते ही वाहन चालकों और संचालकों में अफरातफरी का माहौल बन गया।
जेएएच और कैंसर अस्पताल परिसर में मिलीं खामियां
परिवहन अमले ने शहर के जयारोग्य अस्पताल (जेएएच) परिसर, 1000 बिस्तर अस्पताल और कैंसर अस्पताल के बाहर खड़े वाहनों की पड़ताल की। टीम ने मौके पर कुल 45 एंबुलेंसों के कागजातों की गहनता से जांच की, जिसमें गंभीर प्रकार की अनियमितताएं सामने आईं।
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि इनमें से 15 गाड़ियां ऐसी थीं जो बिना फिटनेस प्रमाण-पत्र, बिना बीमा और बिना प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) दस्तावेजों के ही मरीजों की जिंदगी दांव पर लगाकर सड़कों पर फर्राटा भर रही थीं।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर 57 हजार का जुर्माना
यात्री सुरक्षा और नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले इन वाहन संचालकों के खिलाफ विभाग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए मौके पर ही 57 हजार रुपए का अर्थदंड वसूला। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मरीजों के जीवन की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अधिकारियों ने सभी एंबुलेंस संचालकों को चेतावनी दी है कि वे तत्काल अपने सभी दस्तावेज वैध करवा लें और परिवहन नियमों का पूर्ण पालन करें। प्रशासन की इस चेतावनी के बाद शहर में आगे भी ऐसे सख्त अभियान जारी रहने की संभावना है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!