वर्ष 2013 की सब इंस्पेक्टर भर्ती से जुड़ा है मामला
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल यानी व्यापमं द्वारा वर्ष 2013 में आयोजित की गई पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े को लेकर ग्वालियर के सीजेएम की विशेष अदालत ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। इस प्रकरण में अदालत ने असली अभ्यर्थी विपिन कुमार और उसकी जगह परीक्षा में बैठा सॉल्वर अमितेश, दोनों को ही दोषी माना है।
न्यायलय ने दोनों आरोपियों को आपराधिक षड्यंत्र रचने, धोखाधड़ी करने, प्रतिरुपण, दस्तावेज में कूट रचना करने और मध्य प्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी करार दिया है। हालांकि, अदालत ने उन्हें कुछ गंभीर धाराओं जैसे 467, 468 और 471 से बरी कर दिया है, लेकिन अन्य सुसंगत धाराओं में दोष सिद्ध पाया है। फिलहाल सजा के बिंदु पर फैसला सुरक्षित रखा गया है।
अदालत की सख्त टिप्पणी, योग्य छात्रों का टूटता है मनोबल
अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि इस तरह के अपराधों से संपूर्ण चयन प्रक्रिया, युवा वर्ग और समाज पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। अनुचित साधनों के इस्तेमाल से पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगते हैं और मेहनती व योग्य छात्रों का मनोबल टूटता है। ऐसे मामलों में न्याय व्यवस्था का कड़ा रुख होना जरूरी है।
परीक्षा केंद्र के गेट पर ही धरा गया था फर्जी परीक्षार्थी
इस पूरे मामले की विवेचना डीएसपी मुकुल रावत द्वारा की गई थी। घटना 9 मार्च 2014 की है, जब गुना के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में परीक्षा केंद्र बनाया गया था। परीक्षा शुरू होने से पूर्व केंद्र पर तैनात वीक्षकों और केंद्राध्यक्ष डॉ. सुमन श्रीवास्तव को एक परीक्षार्थी की गतिविधि पर संदेह हुआ।
छानबीन के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि मूल अभ्यर्थी विपिन कुमार के स्थान पर अमितेश परीक्षा में शामिल होने की फिराक में था। जब प्रवेश पत्र की तस्वीर का मिलान चेहरे और वोटर आईडी कार्ड से किया गया, तो भारी अंतर पाया गया। इसके बाद सतर्कता दिखाते हुए सॉल्वर अमितेश को मुख्य द्वार पर ही दबोच लिया गया।
बचाव पक्ष की दलीलें खारिज, षड्यंत्र साबित
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क रखा गया था कि दोनों आरोपियों के बीच कोई सीधा संपर्क प्रमाणित नहीं हुआ है और सॉल्वर मुख्य परीक्षा हॉल के अंदर भी प्रवेश नहीं कर पाया था। हालांकि, अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए इन तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आपराधिक षड्यंत्र का अपराध आपसी सहमति बनते ही पूर्ण हो जाता है। फर्जी प्रवेश पत्र तैयार करवाकर परीक्षा में बैठने का प्रयास करना ही इस साजिश को पूरी तरह से प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!