ग्वालियर अंचल में रेलवे में नौकरी लगवाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी से जुड़े बहुचर्चित मामले में फंसे पुलिस अधिकारियों को उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने विशेष अदालत द्वारा पुलिसकर्मियों के खिलाफ लिए गए संज्ञान के आदेश को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। अदालत का कहना है कि प्रारंभिक चरण की सुनवाई के दौरान विशेष अदालत ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ऐसा आदेश पारित कर दिया था, प्रतीत होता है कि मानो पूरे मामले का ट्रायल पहले ही पूरा हो चुका हो।

किन पुलिस अधिकारियों को मिली राहत

इस कानूनी प्रक्रिया में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह चंदेल, थाटीपुर थाने के तत्कालीन प्रभारी सुरेंद्र नाथ सिंह यादव, उप निरीक्षक अजय सिंह सिकरवार और आरक्षक संतोष वर्मा द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई की गई। इसके बाद हाईकोर्ट ने 11 मई 2026 को विशेष न्यायाधीश (एमपी डकैती एवं अपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम) द्वारा दिए गए आदेश को खारिज कर दिया। विशेष अदालत ने इन सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 392, 201, 120-बी और एमपीडीवीपीके एक्ट की धाराओं के तहत संज्ञान लिया था।

हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आपराधिक कानून का इस्तेमाल न तो सरकारी कर्मचारियों को संरक्षण देने के लिए किया जा सकता है और न ही जांच अधिकारियों से व्यक्तिगत रंजिश निकालने या बदला लेने का साधन बनाया जा सकता है। सीआरपीसी की धारा 200 और 202 के तहत प्राथमिक सुनवाई के समय अदालत का काम सिर्फ यह देखना होता है कि मामला आगे बढ़ाने लायक प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य हैं या नहीं। इस शुरुआती स्तर पर गवाहों की सत्यता परखने या साक्ष्यों का अंतिम मूल्यांकन करने का अधिकार अदालत को नहीं होता है।

अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि केवल सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित न रहने मात्र से स्वतः ही साक्ष्य मिटाने (धारा 201) या आपराधिक षड्यंत्र का मामला नहीं बनता। इसके लिए स्पष्ट आपराधिक नीयत और ठोस प्रमाण होने की आवश्यकता होती है। पुलिस अधिकारियों की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील ने दलील दी थी कि सभी अधिकारी अपने आधिकारिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे और बिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के इस तरह की कानूनी कार्रवाई करना कानून सम्मत नहीं है।

साल 2023 के ठगी प्रकरण से जुड़ा है पूरा मामला

यह पूरा विवाद वर्ष 2023 में थाटीपुर थाने में दर्ज रेलवे भर्ती ठगी कांड से जुड़ा हुआ है। जांच के दौरान शिकायतकर्ता अनूप राणा के भाई विक्रम राणा को मुख्य आरोपी बनाया गया था, और बाद में अनूप राणा की संलिप्तता सामने आने पर उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया था। जेल से छूटने के बाद अनूप राणा ने विशेष अदालत में परिवाद दाखिल किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि पुलिस अधिकारियों ने मामले में राहत देने और फर्जी एनकाउंटर की धमकी देकर उससे करीब 30 लाख रुपये की वसूली की है। साथ ही थाने के फुटेज नष्ट करने के आरोप भी लगाए गए थे, जिन्हें अब हाईकोर्ट ने कानूनी रूप से खारिज कर दिया है।