ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर एक हृदय विदारक घटना में अपने पिता से बिछड़ गए दो मासूम बच्चों को राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने 'ऑपरेशन हमदर्द' अभियान के तहत उनके परिवार से सुरक्षित मिला दिया है। भीड़भाड़ वाले स्टेशन पर अकेले रोते हुए मिले इन भाई-बहनों को जीआरपी की त्वरित कार्रवाई के बाद राहत मिली।

घटनाक्रम: पिता से कैसे बिछड़े बच्चे

जीआरपी थाना प्रभारी दीपशिखा तोमर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ये बच्चे अपने पिता के साथ उत्तर प्रदेश के महोबा में एक वैवाहिक समारोह से लौट रहे थे। ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर पहुंचने के बाद उन्हें दिल्ली के लिए एक अन्य ट्रेन पकड़नी थी। इसी दौरान, बच्चों के पिता अपना मोबाइल चार्जर लेने के लिए स्टेशन से बाहर चले गए।

पिता के काफी देर तक वापस न लौटने पर दोनों छोटे बच्चे घबरा गए और स्टेशन परिसर में रोने लगे। उनकी यह स्थिति देखकर स्टेशन पर मौजूद यात्रियों का ध्यान उनकी ओर गया, लेकिन जीआरपी की टीम ने सक्रियता दिखाते हुए बच्चों को अपनी निगरानी में लिया।

जीआरपी की तत्परता और पहचान प्रक्रिया

स्टेशन पर नियमित गश्त के दौरान थाना प्रभारी दीपशिखा तोमर की नजर इन बच्चों पर पड़ी। उन्होंने तुरंत बच्चों को अपने संरक्षण में लिया, उन्हें सांत्वना दी और उनके परिवार के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास किया। बच्चों द्वारा दी गई अधूरी जानकारी के आधार पर जीआरपी ने दिल्ली में उनके पड़ोसियों से संपर्क साधा।

जीआरपी ने वीडियो कॉल के माध्यम से बच्चों की पहचान उनके पड़ोसियों से कराई, जिन्होंने बच्चों की पुष्टि की और उनके परिवार से संपर्क स्थापित करने में मदद की। सभी आवश्यक जानकारियों का सत्यापन करने के बाद, जीआरपी ने बच्चों के पिता का पता लगा लिया।

मंगलवार को सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद, जीआरपी ने दोनों बच्चों को उनके पिता को सौंप दिया। इस सफल पुनर्मिलन से बच्चों और उनके पिता, दोनों के चेहरे पर खुशी लौट आई।

'ऑपरेशन हमदर्द' की सफलता

जीआरपी अधिकारियों ने बताया कि 'ऑपरेशन हमदर्द' का मुख्य उद्देश्य रेलवे स्टेशनों पर बिछड़े हुए, लावारिस या संकटग्रस्त बच्चों और जरूरतमंद व्यक्तियों को उनके परिजनों तक सुरक्षित पहुंचाना है। इस अभियान के तहत अब तक आठ से अधिक बच्चों को उनके परिवारों से मिलाया जा चुका है, और यह घटना भी इस मानवीय पहल की एक महत्वपूर्ण सफलता है।