ग्वालियर जिले के बिलौआ क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन के मामले में हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन और खनिज विभाग के कामकाज पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रतिबंधित या वैकल्पिक मार्गों से खनिज का अवैध परिवहन जारी रहता है, तो इसकी पूरी जवाबदेही ग्वालियर कलेक्टर की होगी।

प्रभारी खनिज अधिकारी को जेल भेजने की चेतावनी

अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा है कि यदि प्रभारी खनिज अधिकारी घनश्याम यादव पर लगे आरोप सही साबित होते हैं, तो उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाएगा।

जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान उठे गंभीर सवाल

यह पूरा मामला जस्टिस जी.एस. अहलुवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डबल बेंच के समक्ष जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ता अकरम खान के वकील अनिल मिश्रा ने अदालत को बताया कि 579 करोड़ रुपये का बकाया होने के कारण बंद की गईं 16 खदानों के संचालक अशोक सिंह यादव, अपनी दो अन्य स्वीकृत खदानों की आड़ में प्रतिबंधित क्षेत्र से अवैध उत्खनन करवा रहे हैं। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि खनिज अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर अवैध रॉयल्टी पर्चियां दे रहे हैं।

सीसीटीवी फुटेज और लीज फाइलें तलब

स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए हाईकोर्ट ने बिलौआ टोल प्लाजा के पिछले एक महीने के सीसीटीवी फुटेज और भोपाल से मंगाई गई संबंधित फाइलों को अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक खेडकर की सुरक्षित कस्टडी में रखने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, कुल 83 खदानों की लीज से जुड़ी फाइलें भी कोर्ट ने तलब की हैं।

अदालत ने प्रभारी खनिज अधिकारी को यह निर्देश भी दिए हैं कि वे अशोक सिंह यादव की तीनों खदानों से बीते दो महीनों में हुए कुल उत्पादन का रिकॉर्ड शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत करें। साथ ही यह हलफनामा देने को कहा गया है कि माइनिंग सेक्शन में इससे जुड़ा कोई अन्य दस्तावेज नहीं छिपाया गया है। तथ्य छिपाने की स्थिति में अवमानना कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित क्षेत्र के एसडीएम को मौके का मुआयना कर तत्काल रिपोर्ट सौंपने को कहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि खदानों के ट्रकों को टोल और कैमरों से बचाने के लिए किसी अवैध या वैकल्पिक रास्ते का इस्तेमाल तो नहीं हो रहा है।