ग्वालियर के प्रतिष्ठित सिंधिया राजघराने में दशकों से चला आ रहा संपत्ति विवाद अब एक बड़े समझौते की ओर बढ़ रहा है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से ग्वालियर जिला न्यायालय में एक आवेदन दायर किया गया है, जिससे इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है।
हालांकि, रिकॉर्ड रूम से फाइलें उपलब्ध न होने के कारण बुधवार को इस आवेदन पर सुनवाई नहीं हो सकी और इसे टाल दिया गया। इस समझौते के तहत, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं, जिनमें राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया शामिल हैं, के बीच अरबों रुपये की शाही संपत्तियों के बंटवारे पर सहमति बन चुकी है।
समझौते का आधार और कानूनी प्रक्रिया
पारिवारिक बैठकों के कई दौर के बाद, समझौते का अंतिम मसौदा तैयार कर लिया गया है और अब केवल कानूनी मंजूरी बाकी है। इस ऐतिहासिक समझौते के लागू होने से दिल्ली, मुंबई, पुणे और ग्वालियर की अदालतों में वर्षों से लंबित एक दर्जन से अधिक मुकदमे समाप्त हो जाएंगे।
सूत्रों के अनुसार, समझौते का मूल मंत्र 'जो जहां काबिज, वो संपत्ति उसी की' रखा गया है, जिसका उद्देश्य आपसी कड़वाहट को दूर करना है। यह एक व्यावहारिक दृष्टिकोण है जो विवादों को सुलझाने में मदद करेगा।
संपत्तियों का स्वरूप और ट्रस्ट
सिंधिया राजपरिवार की अधिकांश संपत्तियां सीधे व्यक्तियों के नाम पर न होकर, 1970 के दशक से 'सर जयाजीराव ट्रस्ट' और 'कृष्ण माधव ट्रस्ट' जैसी संस्थाओं के अधीन हैं। दिल्ली में 'सिंधिया पॉटरीज' की जमीन पर बनी तीन आलीशान कोठियों में वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और ऊषा राजे राणा निवास करती हैं।
पूर्व में हुए पारिवारिक बंटवारे के तहत, माधवराव सिंधिया को 'सिंधिया इंवेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड (SIPL)' की कमान मिली थी, जिसका प्रबंधन अब ज्योतिरादित्य सिंधिया कर रहे हैं।
राजमाता की प्रिय धरोहर का हस्तांतरण
संपत्ति बंटवारे का एक भावनात्मक पहलू राजमाता विजयाराजे सिंधिया का पन्ने (रत्न) का 'दिव्य शिवलिंग' है। राजमाता इस शिवलिंग की प्रतिदिन विशेष आराधना करती थीं और इसे अपने पास रखती थीं। वर्तमान में यह शिवलिंग वसुंधरा राजे सिंधिया के पास है।
विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि नए समझौते के तहत, यह ऐतिहासिक और राजमाता की सबसे प्रिय धरोहर अब उनके पोते, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को मिलने जा रही है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।





टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!