ग्वालियर में मानसून की पहली बारिश ने ही शहर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी है। शहर के कई हिस्से पानी में डूब गए हैं, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नगर निगम भले ही नालों की सफाई के बड़े-बड़े दावे कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
नालों पर अतिक्रमण: जलभराव की मुख्य वजह
शहर में जलभराव की सबसे बड़ी वजह नालों पर बढ़ता अतिक्रमण और उनमें जमा गंदगी है। आंकड़ों के मुताबिक, ग्वालियर में कुल 439 छोटे-बड़े नाले हैं। इनमें से अधिकांश नालों पर लंबे समय से अवैध कब्जे हैं, जिसके कारण बारिश का पानी शहर से बाहर नहीं निकल पाता। इसी का नतीजा है कि हर साल लगभग 200 स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन जाती है। इस बार भी शुरुआती बारिश में कई सड़कें और आवासीय कॉलोनियां पानी में डूब गईं।
निगम के दावे और जनता की शिकायतें
नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर प्रतीक राव ने जानकारी दी है कि 439 में से 419 नालों की सफाई का काम पूरा कर लिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि नालों पर हुए अतिक्रमण को चिन्हित कर लिया गया है और जल्द ही उन्हें हटाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
हालांकि, स्थानीय निवासियों का कहना है कि निगम के ये दावे सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं। उनका आरोप है कि कई नालों में अब भी गाद और कचरा भरा हुआ है, जबकि अतिक्रमण के कारण पानी का बहाव पूरी तरह रुका हुआ है। यही वजह है कि थोड़ी सी बारिश में ही सड़कें तालाब का रूप ले लेती हैं और लोगों को आवागमन में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
राजनीतिक और न्यायिक दबाव
इस गंभीर समस्या को लेकर नगर निगम परिषद में कांग्रेस पार्षदों ने भी अपना विरोध दर्ज कराया है। वहीं, इस मामले से जुड़ी एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने भी नगर निगम की तैयारियों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की थी।
जनता की लगातार बढ़ती शिकायतों और चारों ओर से पड़ रहे दबाव के बीच, नगर निगम सभापति ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने 15 दिनों के भीतर सभी नालों की सफाई और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी करने को कहा है। अब शहरवासी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि निगम के ये दावे कब तक हकीकत में बदलते हैं और उन्हें जलभराव की समस्या से निजात मिलती है।





टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!