सावन मास के अंतिम सोमवार के पावन अवसर पर ग्वालियर के मध्य स्थित ऐतिहासिक हजारेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। सुबह से ही मंदिर परिसर हर हर महादेव के जयकारों से गूंज रहा है और दूर-दूर से पहुंचे भक्त कतारों में लगकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।

पांच सौ साल से अधिक पुराना है 'मोटे महादेव' का स्वरूप

इस प्राचीन मंदिर में स्थापित मुख्य शिवलिंग करीब 500 वर्ष से अधिक पुराना माना जाता है। लगभग साढ़े पांच फीट ऊंचे और तीन फीट चौड़े इस विशाल शिवलिंग को स्थानीय स्तर पर 'मोटे महादेव' के नाम से भी पुकारा जाता है। इस अद्भुत शिवलिंग पर भगवान शिव के 55 मुख और कुल 1108 छोटे-छोटे शिवलिंग उत्कीर्ण हैं।

दूर से देखने पर इस शिवलिंग का रंग प्राकृतिक रूप से तांबे यानी पीतांबर जैसा प्रतीत होता है, जो इसकी भव्यता को और अधिक बढ़ा देता है। यही कारण है कि सावन के इस अंतिम सोमवार को यहां भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है।

एक बार जल चढ़ाने से मिलता है 1164 रुद्राभिषेक का पुण्य

मंदिर के पुजारी पंडित विनय भार्गव ने बताया कि सावन के महीने में भोलेनाथ का जलाभिषेक करना अत्यंत फलदायी होता है। चूंकि इस मुख्य शिवलिंग के भीतर एक हजार से ज्यादा छोटे शिवलिंग विराजमान हैं, इसलिए इसे हजारेश्वर महादेव के रूप में पूजा जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि इस मंदिर में आकर यदि कोई भक्त एक बार भी सच्चे मन से जल अर्पित कर दे, तो उसे 1164 रुद्राभिषेक करने के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि श्रद्धालु दूध, जल और बेलपत्र लेकर अलसुबह से ही मंदिर पहुंच रहे हैं।

नंदी महाराज के कान में मनोकामनाएं कह रहे हैं भक्त

मंदिर परिसर में स्थापित करीब 4 फीट ऊंची नंदी महाराज की प्रतिमा भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस प्रतिमा की बनावट ऐसी प्रतीत होती है मानो नंदी अभी उठने की मुद्रा में हों।

श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि नंदी जी के कान में अपनी मनोकामना कहने से वह सीधी भगवान शिव तक पहुंच जाती है। इसके अलावा, शिवलिंग के समीप ही माता पार्वती की प्रतिमा भी स्थापित है, जहां पूजा-अर्चना करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होने की मान्यता है।