ग्वालियर में सायबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। राज्य सायबर पुलिस मुख्यालय भोपाल और केंद्रीय गृह मंत्रालय के इंडियन सायबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप 'ऑपरेशन QATM' चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत गोला का मंदिर थाना पुलिस ने सायबर ठगी के एक नेटवर्क पर शिकंजा कसा है। राष्ट्रीय सायबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) से मिले इनपुट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
CCTV फुटेज और जांच से हुआ खुलासा
इस पूरे मामले की तफ्तीश कर रहे उपनिरीक्षक मुनेन्द्र सिंह भदौरिया ने जानकारी दी कि वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में पिंटू पार्क स्थित पटेल मार्केट में बने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम बूथ (SCDN219602) की गहन जांच की गई। जब वहां के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, तो यह बात सामने आई कि 04 मई 2026 को दो अज्ञात संदिग्ध व्यक्तियों ने सेंट्रल बैंक के एक खास खाते से धोखाधड़ी की रकम निकाली थी।
देश के कई राज्यों में दर्ज हैं शिकायतें
पुलिस ने जब इस संदिग्ध बैंक खाते की जानकारी सायबर क्राइम पोर्टल पर निकाली, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। इस एक ही बैंक खाते के माध्यम से देश के अन्य राज्यों में भी ठगी की वारदातों को अंजाम दिए जाने की पुष्टि हुई। रिकॉर्ड के अनुसार, मध्य प्रदेश के सीधी जिले के थाना कोतवाली में इस खाते से जुड़ी शिकायत दर्ज है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के लखनऊ कमिश्नरेट के थाना मादेयगंज में भी इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है।
BNS के तहत मामला दर्ज और आरोपियों की गिरफ्तारी
पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात साफ हो गई कि बैंक खाते का संचालक और एटीएम से नकदी निकालने वाले संदिग्ध लोग एक सोची-समझी साजिश के तहत आम जनता को अपनी ठगी का शिकार बना रहे थे। इसके बाद गोला का मंदिर थाना पुलिस ने बैंक खाताधारक और नकदी निकालने वाले दोनों अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
इस मामले में पकड़े गए एक आरोपी की पहचान 23 वर्षीय रमन शर्मा (पुत्र विशम्भर शर्मा, निवासी त्यागी मोहल्ला रौन, हाल निवासी हनुमान नगर, गोले का मंदिर) के रूप में हुई है। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि वह सेंट्रल बैंक (पिंटो पार्क), महाराष्ट्र बैंक और एसबीआई (राममंदिर) के एटीएम से नकदी निकाला करता था, जिसके एवज में उसे सोनू उर्फ सुदर्शन शर्मा द्वारा 500 रुपये दिए जाते थे।
वहीं, दूसरे आरोपी की पहचान 19 वर्षीय शिवांग श्रीवास्तव (पुत्र संजीव श्रीवास्तव, मूल निवासी मिहोना भिंड, हाल निवासी गोले का मंदिर) के रूप में हुई है, जिसे भी सोनू शर्मा से हर काम के लिए 500 रुपये मिलते थे। फिलहाल पुलिस इन दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और देश भर में फैलाए गए उनके नेटवर्क के बारे में और अहम जानकारियां जुटाई जा सकें।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!