ग्वालियर। शहर में अवैध होर्डिंग्स और यूनिपोल के बढ़ते जाल को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने नगर निगम को निर्देश दिया कि शहर में लगे सभी अवैध होर्डिंग्स और यूनिपोल को 15 दिनों के भीतर हटाया जाए। साथ ही इस पूरे अभियान की प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।
सुनवाई के दौरान ग्वालियर नगर निगम ने अदालत के समक्ष 10 बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट पेश की। निगम ने स्वीकार किया कि शहर में 100 से अधिक अवैध यूनिपोल और होर्डिंग्स लगे हुए हैं। नगर निगम की ओर से बताया गया कि इन्हें हटाने के लिए विशेष टीम गठित कर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन अदालत ने इस प्रक्रिया को पर्याप्त नहीं माना और अभियान में तेजी लाने को कहा।

याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि खंडपीठ ने केवल अवैध होर्डिंग्स हटाने तक ही सीमित रहने के बजाय उन अधिकारियों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, जिनकी लापरवाही या संरक्षण के कारण ये अवैध संरचनाएं शहर में खड़ी हुईं। अदालत ने स्पष्ट किया कि जवाबदेही तय करना भी उतना ही आवश्यक है।
हाईकोर्ट ने विशेष रूप से उन होर्डिंग्स और यूनिपोल को तत्काल हटाने का आदेश दिया है, जो ट्रैफिक सिग्नलों, सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। अदालत ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी अवैध विज्ञापन को इसके आड़े नहीं आने दिया जा सकता।

सुनवाई के दौरान अदालत ने नेताओं के जन्मदिन, स्वागत समारोह और अन्य आयोजनों के नाम पर बिना अनुमति लगाए जाने वाले बड़े-बड़े होर्डिंग्स पर भी चिंता जताई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भविष्य में बिना विधिवत अनुमति कोई भी होर्डिंग या यूनिपोल नहीं लगाया जाना चाहिए तथा संबंधित नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।
अब निगाहें नगर निगम की कार्रवाई पर टिकी हैं कि अदालत के आदेशों का पालन कितनी तेजी और गंभीरता से किया जाता है तथा अवैध होर्डिंग्स लगाने और उन्हें संरक्षण देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।






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बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!