ग्वालियर में सरकारी जमीन से जुड़े अभिलेखों में कथित हेराफेरी और न्यायालय में विचाराधीन प्रकरण को प्रभावित करने के मामले में जिला प्रशासन ने एक और महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। इस प्रकरण में पहले पटवारी को निलंबित किया गया था, जिसके बाद अब रिकॉर्ड रूम के दो कर्मचारियों और एक वादी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

रिकॉर्ड रूम के कर्मचारियों पर FIR

11 जुलाई को पटवारी कुलदीप चाहर के निलंबन के बाद हुई विस्तृत जांच में रिकॉर्ड रूम में पदस्थ सहायक वर्ग-3 सतपाल कुशवाह और भृत्य वीरेन्द्र कुशवाह की संलिप्तता सामने आई। इसके परिणामस्वरूप, विश्वविद्यालय थाना में इन दोनों कर्मचारियों के साथ-साथ मामले के आरोपी वादी धर्मवीर के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।

आरोप है कि सतपाल कुशवाह और वीरेन्द्र कुशवाह ने वादी धर्मवीर के साथ मिलकर राजस्व अभिलेखों में गड़बड़ी की। उन्होंने महत्वपूर्ण खसरा पंजी और अन्य सरकारी रिकॉर्ड के कुछ पन्ने फाड़कर नष्ट कर दिए, जिसका उद्देश्य न्यायालय में चल रहे प्रकरण में वादी पक्ष को अनुचित लाभ पहुंचाना था।

पटवारी का निलंबन और प्रारंभिक जांच

इस मामले की शुरुआत तब हुई जब जिला प्रशासन की प्रारंभिक जांच में ग्राम महू की विवादित सरकारी जमीन से जुड़े एक प्रकरण में पटवारी कुलदीप चाहर की लापरवाही उजागर हुई। न्यायालय में शासन की ओर से साक्षी बने पटवारी चाहर ने मूल राजस्व अभिलेखों का सत्यापन किए बिना ही वादी धर्मवीर द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को सही मान लिया था।

साथ ही, उन्होंने उपलब्ध शासकीय रिकॉर्ड को भी न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं किया। इसे गंभीर लापरवाही और शासन के हितों के विपरीत मानते हुए, कलेक्टर रुचिका चौहान ने 11 जुलाई 2026 को कुलदीप चाहर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। पटवारी के निलंबन के बाद ही जिला प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच का आदेश दिया, जिसमें रिकॉर्ड रूम के कर्मचारियों की भूमिका सामने आई।

पुलिस जांच और प्रशासन का रुख

अब विश्वविद्यालय थाना पुलिस इस पूरे षड्यंत्र की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे और सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कब और किस तरीके से की गई।

अपर कलेक्टर कुमार सत्यम ने इस संबंध में कहा कि सरकारी अभिलेखों से छेड़छाड़ एक गंभीर अपराध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन के हितों के खिलाफ किसी भी प्रकार की अनियमितता या दस्तावेजों में हेराफेरी करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।