ग्वालियर शहर में आपसी भरोसे और दोस्ती की आड़ में व्यापारिक धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ टिन (कनस्तर) और अन्य कारोबार के नाम पर शुरू किए गए काम में दस्तावेजों तथा जीएसटी के साथ बड़ा खिलवाड़ किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में पीड़ित व्यापारी को चार करोड़ तिरालीस लाख रुपये से अधिक का चूना लगाया गया, जिससे स्थानीय कारोबारी हलकों में भी हड़कंप मच गया है।

अदालत के निर्देश पर दर्ज हुआ मामला

जब पीड़ित कारोबारी ने अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपियों ने दोटूक इनकार कर दिया। इसके बाद न्याय के लिए अदालत की शरण ली गई। प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में सुनवाई के बाद झांसी रोड थाना पुलिस को इस षडयंत्र और धोखाधड़ी के मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए। पुलिस ने मंगलवार को न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर आगे की तफ्तीश शुरू कर दी है।

योजनाबद्ध तरीके से फंसाया और हथियाए वाहन

झांसी रोड थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले लश्कर इलाके के निवासी व्यापारी विशाल तेजा के साथ अनिल कुमार इसरानी और उसके साथियों ने मिलकर 4,43,50,815 रुपये की इस भारी धोखाधड़ी को अंजाम दिया है। शुरुआती दौर में आरोपियों ने पीड़ित को भरोसे में लेकर व्यापार में निवेश के लिए राजी किया। इसके बाद बिना उनकी जानकारी के फर्जी फर्मों का जाल बुना गया, जीएसटी में हेरफेर की गई और व्यापार से जुड़े तमाम वाहन तथा माल भी अपने कब्जे में ले लिए गए।

इन लोगों पर हुई नामजद कार्रवाई

न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के आधार पर पुलिस ने मुख्य आरोपी अनिल इसरानी, उनकी पत्नी शोभा इसरानी, सनी लोहानी, भगीरथ उर्फ गिल्लू, लछमीचंद उर्फ लल्लू और खेमराज उर्फ गुड्डू के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस अब इन सभी आरोपियों की संलिप्तता के दायरे और दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है।

डिजिटल सिग्नेचर का दुरुपयोग कर खोली फर्जी फर्में

फरियादी विशाल तेजा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022 में उनके पिता की अस्वस्थता के दौरान आरोपियों ने उनके डिजिटल सिग्नेचर (DSC) और अन्य जरूरी कागजातों का गलत इस्तेमाल करते हुए जयपुर और दिल्ली में फर्जी फर्में तथा शाखाएं खड़ी कर लीं। बिना किसी वास्तविक माल की आवाजाही के फर्जी बिल और ई-वे बिल तैयार किए गए, जिसके जरिए करोड़ों के जीएसटी घोटाले को अंजाम दिया गया। जब दिल्ली के गोदाम पर माल एवं सेवा कर विभाग की टीम ने छापा मारा, तब जाकर इस बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ।

अक्टूबर 2023 के दौरान जब पीड़ित ने अपने हिसाब-किताब की बात उठाई, तो आरोपियों ने न केवल उनके साथ अभद्रता और मारपीट की, बल्कि उनके गोदामों पर ताले जड़कर पूरे सामान और ट्रांसपोर्ट वाहनों पर अवैध कब्जा कर लिया। पैसे मांगने पर झूठे मामलों में फंसाने और जान से खत्म करने की धमकियां दी गईं। सीएसपी रवि भदौरिया ने इस संबंध में बताया कि अदालत के आदेश पर मामला दर्ज कर लिया गया है और मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।