ग्वालियर शहर में ऑनलाइन ट्रेडिंग और सस्ते आईपीओ का झांसा देकर साइबर ठगी करने का एक नया मामला सामने आया है। यहां एक रेलवे कर्मचारी को फर्जी ऐप के जरिए करोड़ों रुपए का मुनाफा दिखाने के बाद करीब 35.27 लाख रुपए की चपत लगा दी गई है। पीड़ित की शिकायत पर थाटीपुर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर अपनी जांच शुरू कर दी है।

फेसबुक विज्ञापन से शुरू हुआ ठगी का पूरा खेल

थाटीपुर थाना क्षेत्र के चौहान प्याऊ निवासी देवव्रत कटारे रेलवे में कार्यरत हैं। मार्च 2025 में उन्होंने फेसबुक पर ट्रेडिंग से जुड़ा एक विज्ञापन देखा था, जिस पर क्लिक करने के बाद उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ लिया गया। ग्रुप से जुड़ने के बाद आरोपियों ने उन्हें नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट के नाम से एक फर्जी एप्लीकेशन डाउनलोड करने के लिए कहा।

ठगों ने पीड़ित को बाजार भाव से 10 से 30 फीसदी तक सस्ते शेयर और सौ फीसदी तक के डिस्काउंट पर आईपीओ दिलाने का लालच दिया। अपना जाल मजबूत करने के लिए बदमाशों ने यह भी दावा किया कि वे रोजाना 50 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन करते हैं, जिससे पीड़ित उनके झांसे में आ गया।

फर्जी एप पर दिखाया ढाई करोड़ का भारी-भरकम मुनाफा

आरोपियों ने प्ले स्टोर के नाम पर एक लिंक भेजकर देवव्रत के फोन में 'nuvaama' और बाद में 'blinkx pro' एप इंस्टॉल करवा लिए। इसके बाद उनके पैन और आधार कार्ड के जरिए अकाउंट बनवाए गए। एप में जैसे ही पैसे जमा होते, वैसे ही मुनाफे का आंकड़ा तेजी से बढ़ने लगता था।

जब पीड़ित का फंड बढ़कर करीब 43 लाख रुपए तक पहुंच गया, तो एक आईपीओ के सब्सक्रिप्शन के लिए पैसों की कमी पड़ गई। इस दौरान ठगों ने अपनी ही एक फर्जी कंपनी से 15 लाख रुपए का लोन पास करने का नाटक किया और देवव्रत से और अधिक रकम जमा करवा ली।

42 बार में ट्रांसफर किए गए कुल 35 लाख 27 हजार रुपए

पीड़ित देवव्रत ने अंबाह, मुरैना स्थित अपनी एसबीआई बैंक शाखा के खाते से इंटरनेट बैंकिंग और यूपीआई के जरिए कुल 42 बार में यह रकम ट्रांसफर की थी। उन्होंने नुवामा एप पर 22 बार में 18,20,000 रुपए और ब्लिंक्स प्रो एप पर 16 बार में 17,07,100 रुपए का निवेश किया।

विभिन्न माध्यमों से कुल 35 लाख 27 हजार रुपए निवेश कराने के बाद आरोपियों ने एप के डैशबोर्ड पर उनका मुनाफा दो से ढाई करोड़ रुपए के बीच दिखाना शुरू कर दिया था।

रकम निकालने का प्रयास किया तो कर दिया ब्लॉक

जब पीड़ित ने अपने द्वारा निवेश की गई और मुनाफे की रकम को निकालना चाहा, तो ठगों ने सर्विस फीस और रिस्क अलर्ट हटाने के नाम पर और पैसों की मांग की। ठगी का अहसास होने पर जब उन्होंने विरोध किया और अपने रुपए वापस मांगे, तो आरोपियों ने उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप से बाहर कर दिया और हर जगह से ब्लॉक कर दिया।