ग्वालियर के जाने-माने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और मध्य प्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के मुख्य निर्वाचन अधिकारी, 70 वर्षीय अशोक विजयवर्गीय, एक बड़े साइबर धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं। उनसे 21 करोड़ 6 लाख रुपये की ठगी की गई है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है।

अंतरराष्ट्रीय ठगों का जाल

राज्य साइबर सेल, ग्वालियर द्वारा की गई शुरुआती तकनीकी जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगों ने इस पूरी रकम को चार अलग-अलग स्तरों (लेयर्स) में बांट दिया। इस पैसे को 20 हजार से भी ज्यादा बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया, जिनका फैलाव कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक था।

जांच दल ने 99 प्रथम-स्तरीय बैंक खातों की पहचान की है जो अब साइबर टीम की निगरानी में हैं। हालांकि, पुलिस की त्वरित कार्रवाई से अब तक करीब 2 करोड़ रुपये की राशि को फ्रीज (रोक) करने में सफलता मिली है।

देशव्यापी ट्रांजेक्शन नेटवर्क

साइबर जांच से पता चला है कि ठगों ने पैसों को किसी एक या दो शहरों तक सीमित नहीं रखा। रकम को कन्याकुमारी, कश्मीर, गुजरात और कोलकाता जैसे देश के विभिन्न हिस्सों में फैले हजारों बैंक खातों में भेजा गया। इसके बाद, पैसे को छोटी-छोटी राशियों में विभाजित कर आगे बढ़ाया गया, जिससे जांच एजेंसियों के लिए पैसों के प्रवाह का पता लगाना अत्यंत कठिन हो गया।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ठगों ने इस 21 करोड़ रुपये की राशि को ठिकाने लगाने के लिए पूरे देश के बैंकों का इस्तेमाल किया। चेन्नई से कश्मीर और गुजरात से कोलकाता तक, हजारों बैंक खातों में लाखों ट्रांजेक्शन किए गए।

ठगों का 'फोर-लेयर' चक्रव्यूह

जांच अधिकारियों का मानना है कि ठगों ने पुलिस की पकड़ से बचने के लिए एक अत्यंत जटिल 'फोर-लेयर' (चार-स्तरीय) बैंकिंग प्रणाली का उपयोग किया। इस प्रणाली के तहत, पैसे को कई चरणों में अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया गया।

शिकायत के अनुसार, ठगी के लिए भारतीय मोबाइल नंबरों के अलावा एक विदेशी नंबर (+1 (516) 713-7291) का भी इस्तेमाल किया गया, जो संभवतः किसी अमेरिकी या कनाडाई वर्चुअल नंबर प्लेटफॉर्म से संचालित हो रहा था। ठगों ने फेडरल बैंक, आईसीआईसीआई, केनरा बैंक और यस बैंक जैसी प्रमुख वित्तीय संस्थाओं के कॉर्पोरेट और चालू खातों का उपयोग इस लेयरिंग प्रक्रिया के लिए किया।

इस मामले में सीए से जुड़े 35 से अधिक परिचितों द्वारा ट्रेडिंग में रकम लगाने की बात भी सामने आई है, जो जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू है।