महात्मा गांधी के स्वदेशी और चरखा आंदोलन से प्रेरित होकर सन 1930 में ग्वालियर में स्थापित मध्यभारत खादी संघ ने एक लंबा सफर तय किया है। आज इस ऐतिहासिक संस्था में तैयार होने वाला राष्ट्रीय ध्वज न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी पहचान बना चुका है।
वर्ष 2016 में मिली औपचारिक मान्यता और लाल किले तक पहुंच
संस्था के अध्यक्ष वासुदेव शर्मा के अनुसार, मानकों के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज तैयार करने के लिए लंबे समय से प्रयास चल रहे थे, जिन्हें वर्ष 2016 में सफलता मिली। मंजूरी मिलने के बाद संस्था द्वारा तैयार किया गया पहला मानकयुक्त तिरंगा सीधे दिल्ली स्थित लाल किले की प्राचीर पर फहराया गया। इसके अलावा, ग्वालियर में बने ये झंडे देश के कई उच्च न्यायालयों और सचिवालयों की इमारतों की भी शान बढ़ा चुके हैं।
राष्ट्रीय पर्वों पर एक करोड़ से अधिक का कारोबार
जैसे-जैसे राष्ट्रीय ध्वज की मांग में इजाफा हुआ है, वैसे-वैसे संस्था के कामकाज और कारोबार में भी बड़ा विस्तार देखने को मिला है। एक समय था जब यह कारोबार 15 से 20 लाख रुपए के आसपास सिमटा हुआ था, लेकिन अब स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों के दौरान यह आंकड़ा एक करोड़ रुपए को पार कर जाता है। वर्तमान सीजन में भी अब तक लगभग 60 लाख रुपए मूल्य के तिरंगे बेचे जा चुके हैं।
देश के 18 राज्यों तक हो रही है तिरंगों की आपूर्ति
वर्तमान में ग्वालियर की इस संस्था में निर्मित तिरंगे मध्य प्रदेश की सीमाओं को लांघकर देश के करीब 18 अलग-अलग राज्यों में भेजे जा रहे हैं। आगामी स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर संस्था को 70 से 80 बड़े ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। 'हर घर तिरंगा' जैसे अभियानों के कारण नागरिकों में राष्ट्रीय ध्वज के प्रति उत्साह काफी बढ़ा है, जिससे कारीगरों पर तय समयसीमा में काम पूरा करने का दबाव भी है।
इस प्रतिष्ठित संस्थान की स्थापना में मध्यभारत के पहले मुख्यमंत्री रहे बाबू तख्तमल जैन जैसे स्वतंत्रता सेनानियों और दिग्गजों का अहम योगदान रहा है। शुरुआती दौर से ही इस संस्था ने स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के संकल्प को जीवित रखा है, और आज ग्वालियर में तैयार होने वाला तिरंगा इस शहर की ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित कर रहा है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!