ग्वालियर में सुरक्षा में तैनात एक गार्ड और उसके परिवार के साथ हुई मारपीट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पीड़ित सुरक्षाकर्मी ने जिला जनसुनवाई में पहुंचकर न्याय की मांग की है और पुलिस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई न करने का गंभीर आरोप लगाया है।
वीआईपी पोर्च से गाड़ी हटाने पर हुआ था विवाद
घटना 30 जुलाई की है, जब स्वास्थ्य मंत्री के प्रस्तावित दौरे के चलते जेएएच अस्पताल के 1000 बिस्तर वाले परिसर में सुरक्षाकर्मी योगेंद्र सिंह भदौरिया की ड्यूटी वीआईपी पोर्च पर लगाई गई थी। अधिकारियों के सख्त निर्देश थे कि इस जगह पर केवल अधिकृत वाहन ही पार्क किए जाएं। इसी दौरान वहां एक सफेद रंग की कार (MP07-CH2513) आकर रुकी, जिस पर डॉक्टर का कोई सिंबल नहीं था। जब योगेंद्र ने चालक से वाहन हटाने के लिए कहा, तो विवाद शुरू हो गया।
विवाद बढ़ने पर आरोपी जूनियर डॉक्टर आर्यन धनोलिया ने फोन करके अपने अन्य साथियों को मौके पर बुला लिया। इसके बाद एप्रन पहने छह से अधिक युवकों ने गार्ड योगेंद्र, उनके भाई और भतीजे पर डंडों व लोहे की सरियों से हमला कर दिया।
नाबालिग बेटे को अगवा कर मारपीट और लूटपाट का आरोप
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जब योगेंद्र का 16 वर्षीय बेटा पुलिस को सूचना देने के लिए दौड़ा, तो हमलावरों ने उसे जबरन मोटरसाइकिल पर बैठा लिया। रास्ते भर उसके साथ मारपीट की गई और उसके कान की सोने की बाली तक निकाल ली गई। वहीं, बीच-बचाव करने आए भतीजे भोलू भदौरिया के सिर पर गंभीर चोटें आईं और उसकी सोने की चेन भी झपट ली गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस पूरी घटना के सीसीटीवी फुटेज भी सामने आए हैं, जिसमें हमलावरों की करतूत कैद होने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद पीड़ित परिवार का कहना है कि नामजद शिकायत के बाद भी पुलिस ने मामले में ढिलाई बरती है।
इलाज में देरी और समझौते का दबाव
योगेंद्र भदौरिया ने यह भी आरोप लगाया कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्हें रात एक बजे तक अस्पताल में इलाज के लिए परेशान होना पड़ा, बाद में उनके सिर पर 19 टांके आए। उनके भतीजे को भी 3 टांके लगे। अस्पताल परिसर में ही उन पर लगातार राजीनामा करने का दबाव बनाया गया, जिससे डरकर परिजन मरीज को अगले ही दिन घर ले जाने पर विवश हो गए।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!