गुना जिले के आरोन इलाके में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक डॉक्टर द्वारा गलत तरीके से इंजेक्शन लगाए जाने के कारण एक बच्चे का हाथ खराब हो गया। मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचे बच्चे के पिता ने अपनी पीड़ा सुनाते हुए बताया कि उनके बेटे का भविष्य इस घटना से अंधकारमय हो गया है, क्योंकि वह न तो ठीक से खाना खा पाता है और न ही लिख पाता है।

विदिशा जिले के उनारसी कलां निवासी राजेश अहिरवार ने जनसुनवाई में कलेक्टर को एक आवेदन सौंपा। उन्होंने बताया कि वह मजदूरी करके अपने परिवार का गुजारा करते हैं। लगभग दो महीने पहले, उनके चार वर्षीय बेटे आर्यन को सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायत थी, जिसके इलाज के लिए वे आरोन के सिविल अस्पताल में डॉक्टर महेश राजपूत के पास ले गए थे।

राजेश अहिरवार के अनुसार, डॉक्टर ने आर्यन के इलाज के लिए 1200 रुपये की दवाएं और इंजेक्शन लिखे थे। डॉक्टर महेश ने बच्चे के उल्टे हाथ में इंजेक्शन लगाने की कोशिश की, लेकिन वह सही से नहीं लगा और इसके बाद हाथ में संक्रमण फैल गया। देखते ही देखते, संक्रमण पूरे हाथ में फैल गया और बच्चे का हाथ खराब हो गया, जो अब तक ठीक नहीं हो पाया है।

दो ऑपरेशन के बाद भी नहीं मिला आराम

आर्यन के पिता ने बताया कि बेटे के खराब हुए हाथ का दो बार ऑपरेशन भी कराया जा चुका है। इस उपचार में अब तक लगभग 70 से 80 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। इस भारी खर्च को उठाने के लिए उन्हें अपनी एक बीघा जमीन और कुछ रकम गिरवी रखनी पड़ी। उन्होंने डॉक्टर राजपूत से अपने बेटे का हाथ खराब होने की शिकायत की, जिसके बाद डॉक्टर ने कुछ समय तक गुना के एक निजी अस्पताल में इलाज कराया, लेकिन इससे भी कोई खास सुधार नहीं हुआ।

जब कुछ दिनों बाद भी बच्चे के हाथ में सुधार नहीं हुआ, तो राजेश अहिरवार ने फिर से डॉक्टर से संपर्क किया। इस बार डॉक्टर ने इलाज कराने से इनकार कर दिया और कथित तौर पर गाली-गलौज करते हुए धमकी दी कि 'जो करना है कर लो, अब मैं इलाज नहीं कराऊंगा'।

कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश

पीड़ित पिता ने जनसुनवाई में पहुंचकर कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने अपने आवेदन में मांग की है कि उनके बेटे का हाथ ठीक कराया जाए और लापरवाही बरतने वाले डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। शिकायत मिलने के बाद, कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को मामले की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं।