गुना जिले में ग्रामीण आजीविका मिशन की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले में प्रशासनिक अमले द्वारा चलाई जा रही इस महत्वाकांक्षी योजना में लगातार वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं सामने आ रही हैं, जिससे जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचने में बाधा उत्पन्न हो रही है।
परिवार के सदस्यों को जोड़कर बनाया गया स्व-सहायता समूह
नवीनतम मामले में तत्कालीन बमोरी और वर्तमान चांचौड़ा ब्लॉक प्रबंधक अजब सिंह लोधा पर बड़ा आरोप लगा है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को शामिल करके कागजों पर स्व-सहायता समूह तैयार किया और फिर सरकारी योजनाओं का लाभ अपने ही घर तक सीमित कर लिया।
कलेक्टर को इस संबंध में एक लिखित शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके आधार पर तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया। जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि ग्राम सिमरौद का 'राधाकृष्ण स्व-सहायता समूह', जो कि वर्ष 2013 में पंजीकृत हुआ था, उसमें कुल 10 सदस्य दर्ज हैं। इस समूह को पहले ही आरएफ और सीआईएफ राशि आवंटित की जा चुकी है।
जांच में हुआ सनसनीखेज खुलासा, छह सदस्य निकले एक ही परिवार से
जांच समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, उक्त समूह के कुल 10 सदस्यों में से छह सीधे तौर पर ब्लॉक प्रबंधक अजब सिंह लोधा के परिवार से जुड़े हुए पाए गए। शिकायत में इस बात का भी उल्लेख किया गया था कि परिवार की समग्र आईडी से जुड़े सदस्यों और समूह के सदस्यों के बीच सीधा संबंध है।
समूह से जुड़ी महिलाओं ने जांच के दौरान यह बयान दिया कि उन्हें बैंक से राशि निकलवाने के लिए केवल हस्ताक्षर के वास्ते ले जाया जाता था, लेकिन उन्हें कभी भी योजना का वास्तविक वित्तीय लाभ नहीं मिला। इसके अलावा, समूह का कोई भी आधिकारिक रिकॉर्ड भी मौके पर उपलब्ध नहीं पाया गया।
फार्म मशीनरी योजना के ट्रैक्टर का हो रहा था निजी इस्तेमाल
इस जांच की सबसे अहम बात यह सामने आई कि फार्म मशीनरी योजना के तहत समूह को आवंटित किया गया ट्रैक्टर समूह की महिलाओं के उपयोग के बजाय सीधे ब्लॉक प्रबंधक के घर पर खड़ा मिला। सत्यापन प्रपत्रों में जिन महिलाओं के हस्ताक्षर अध्यक्ष और सचिव के रूप में पाए गए, वे वास्तव में ब्लॉक प्रबंधक की मां और भाभी निकलीं।
कलेक्टर द्वारा जारी किए गए नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता को ताक पर रखा गया और तय नियमों की पूरी तरह से अनदेखी की गई। प्रशासन ने आरोपी ब्लॉक प्रबंधक को नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर अपना जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं, और समयावधि में संतोषजनक उत्तर न मिलने पर एकतरफा कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!