तालाब की पार पर फिर दिखीं दरारें

गुना जिले में स्थित गोपालपुरा तालाब की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण जलस्रोत की पार पर लंबी और गहरी दरारें साफ तौर पर देखी जा सकती हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने मौके पर पहुंचकर इसका वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है, जिसके बाद से आसपास की कॉलोनियों के रहवासियों में डर का माहौल है।

पिछले साल भी आ चुका है संकट

गौरतलब है कि बीते वर्ष 29 जुलाई 2025 को हुई मूसलाधार बारिश के दौरान इस तालाब की पार टूटने की नौबत आ गई थी। उस वक्त बढ़ते जल दबाव को नियंत्रित करने के लिए सिंचाई विभाग के जिम्मेदारों ने पार का एक हिस्सा जानबूझकर काटा था, जिसके पानी से कई रिहायशी इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई थी। विभाग ने उस समय तर्क दिया था कि यदि यह कदम न उठाया जाता तो नुकसान इससे कहीं अधिक बड़ा हो सकता था।

हादसे के बाद विभाग ने तालाब के स्थायी सुधारीकरण और मजबूती के लिए भोपाल मुख्यालय को 2.93 करोड़ रुपए का भारी-भरकम प्रस्ताव भेजा था। लेकिन उच्च स्तर पर इस प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिली और इसके एवض में सिर्फ कुछ लाख रुपए ही मंजूर किए गए। पर्याप्त बजट के अभाव में काम ढंग से नहीं हो सका और नतीजा यह है कि आज दोबारा पार पर खतरनाक दरारें उभर आई हैं।

जलस्तर पहुँचा उफान पर, 83 प्रतिशत से ज्यादा भरा तालाब

सिंचाई विभाग की ओर से 13 अगस्त को जारी की गई आधिकारिक जल रिपोर्ट के अनुसार, गोपालपुरा तालाब का जलस्तर पहले ही 85 प्रतिशत के करीब पहुंच चुका है। मौजूदा समय में यह जिला मुख्यालय के लघु सिंचाई परियोजना वाले सभी तालाबों में सबसे अधिक भरा हुआ जलस्रोत बना हुआ है। ऐसे में यदि क्षेत्र में बारिश का एक और नया दौर सक्रिय होता है, तो कमजोर हो चुकी पार पर भारी दबाव पड़ सकता है।

प्रशासन ने दी सफाई, कहा- डरने की कोई बात नहीं

गोपालपुरा तालाब की पार की ऊंचाई बढ़ाने के लिए उस पर मिट्टी डाली गई थी। बारिश के कारण मिट्टी के बहाव से कुछ जगह कटाव हो गया है, जिसे रेनकट कहते हैं। पार पर रोलर नहीं चल पाने के कारण वहां जेसीबी की मदद से मिट्टी बिछाई जाती है। फिलहाल तालाब पर काम चल रहा है और रेनकट की स्थिति को भी दुरुस्त किया जा रहा है। — नृपेंद्र सिंह, कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन विभाग, गुना