गुना जिले के बमोरी क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक केदारनाथ धाम शिव मंदिर को दो साल पहले ही आम जनता के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था। मंदिर के ऊपर स्थित पहाड़ी की चट्टान में एक बड़ी और खतरनाक दरार आ गई है, जिसके चलते प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से यह कदम उठाया था। हालांकि, प्रतिबंध के बावजूद लोग विभिन्न वैकल्पिक रास्तों से मंदिर परिसर तक पहुंच रहे हैं, जिससे उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
दो वर्षों से बंद है धाम
बमोरी विधानसभा क्षेत्र में स्थित केदारनाथ धाम शिव मंदिर जिले का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। सावन के महीने और महाशिवरात्रि जैसे पर्वों पर यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। वर्षा ऋतु में यहां के झरने भी बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। लेकिन, मंदिर के ठीक ऊपर मौजूद विशाल चट्टान में लगातार चौड़ी होती दरार को देखते हुए, प्रशासन ने लगभग दो साल पहले पूरे क्षेत्र में आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी थी।
ताला लगा होने के बावजूद पहुंच रहे लोग
मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला लगा हुआ है, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग अन्य रास्तों से पहाड़ी के नीचे उतरकर मंदिर परिसर तक पहुंच रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये लोग उसी क्षतिग्रस्त चट्टान के नीचे से गुजरते हैं, जहां कभी भी भू-स्खलन या चट्टान गिरने की आशंका बनी हुई है। यह स्थिति किसी भी समय एक बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
रील और वीडियो शूटिंग बन रही खतरे की वजह
प्रतिबंध के बावजूद, सोशल मीडिया पर सामग्री बनाने वाले लोगों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। कई लोग मंदिर परिसर में रील, ब्लॉग और वीडियो शूट कर रहे हैं, जबकि कुछ तो गर्भगृह तक पहुंचकर गानों की शूटिंग भी कर रहे हैं। इन वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है, जिससे अन्य लोग भी वहां जाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं और अनजाने में अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।
वन विभाग के प्रतिवेदन के बाद भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक मनोज कुमार ने स्थल का निरीक्षण किया था। उनकी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि क्षतिग्रस्त चट्टान कभी भी गिर सकती है और वहां आम लोगों की मौजूदगी एक गंभीर दुर्घटना को न्योता दे सकती है। रिपोर्ट में चट्टान को हटाने या सुरक्षा के लिए कंक्रीट की दीवार बनाने तक पूरे क्षेत्र को बंद रखने की सिफारिश की गई थी।
जीएसआई की रिपोर्ट और वन विभाग की सिफारिशों के आधार पर, तत्कालीन कलेक्टर ने सुरक्षा कारणों से केदारनाथ धाम मंदिर क्षेत्र को अगले आदेश तक आमजन के लिए बंद करने का आदेश जारी किया था। इसके बावजूद, लोग इन निर्देशों की अनदेखी कर लगातार वहां पहुंच रहे हैं, जिससे प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन ने प्रवेश पर रोक तो लगा दी है, लेकिन निगरानी के अभाव में लोग आसानी से दूसरे रास्तों से अंदर पहुंच रहे हैं। ऐसे में यदि चट्टान गिरने जैसी कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह एक बड़ा और अनुत्तरित सवाल बना हुआ है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!