राष्ट्रीय आह्वान के तहत गुना जिले में संयुक्त ट्रेड यूनियन और किसान मोर्चा के बैनर तले विभिन्न कर्मचारी संगठनों, सीटू तथा अन्य श्रमिक यूनियनों ने मिलकर एक विशाल विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में मजदूर और किसान शामिल हुए।
डाक बंगले पर हुई सभा, नेताओं ने की एकजुटता की वकालत
कलेक्ट्रेट तक मार्च निकालने से पहले स्थानीय डाक बंगला परिसर में एक सभा का आयोजन किया गया। इस सभा को सीटू के राज्य उपाध्यक्ष डॉ. विष्णु शर्मा, जिला अध्यक्ष सुरेंद्र सैनी, महासचिव गिरीश कश्यप, ज्ञानेश मेर, आंगनबाड़ी यूनियन की नेता किरण तिवारी, कृष्णा कुशवाह, आशा-ऊषा यूनियन की नेता मिथलेश गोस्वामी, रामवती शिकारी और इंटक नेता राजेंद्र तिवारी सहित कई प्रमुख वक्ताओं ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में देश गंभीर आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संकटों से जूझ रहा है। ऐसे दौर में देश की मुख्य उत्पादक ताकतें यानी मजदूरों और किसानों का एकजुट होना बेहद आवश्यक हो गया है।
चार नई श्रम संहिताओं पर उठाए गए गंभीर सवाल
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार द्वारा लाई गई चार नई श्रम संहिताओं का पुरजोर विरोध किया। नेताओं का आरोप था कि सरकार ने भारतीय श्रम सम्मेलन बुलाए बिना और बिना किसी व्यापक चर्चा के 21 नवंबर 2025 को इन संहिताओं को अधिसूचित कर दिया था, और इसके बाद 8 से 9 मई 2026 के बीच इनकी नियमावली भी जारी कर दी गई।
सभा में वक्ताओं ने यह भी चेतावनी दी कि मध्य प्रदेश सरकार भी इन संहिताओं के नियम लागू करने की प्रक्रिया में जुटी हुई है। उनके अनुसार, इन नए कानूनों से ट्रेड यूनियनों का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा क्योंकि यूनियनों का नया पंजीकरण कराना और उनकी मान्यता बनाए रखना बेहद कठिन हो जाएगा, जबकि आसानी से पंजीकरण रद्द किए जा सकेंगे।
हड़ताल के अधिकार और कार्य समय को लेकर जताई चिंता
श्रमिक नेताओं ने आरोप लगाया कि इन संहिताओं के जरिए नियोक्ताओं द्वारा किए जाने वाले नियमों के उल्लंघनों को वैध ठहराया जा रहा है। स्थिति ऐसी बनाई जा रही है जिससे उद्योगपतियों व नियोक्ताओं को राहत मिले और ट्रेड यूनियन तथा उनके नेता अपराधी की तरह प्रतीत हों।
इसके अलावा कार्यस्थल के निरीक्षण के लिए ऑनलाइन चयन प्रणाली, हड़ताल करने के कानूनी अधिकार को पेचीदा बनाने, काम के घंटे बढ़ाने और निश्चित अवधि के रोजगार को बढ़ावा देने जैसी नीतियों का कड़ा विरोध किया गया। वक्ताओं ने कहा कि इन बदलावों से अधिकांश श्रमिकों की आजीविका और सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है।
विस्तृत प्रदर्शन और नारेबाजी के पश्चात संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा और किसान मोर्चा के कार्यकर्ता जुलूस के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में गिरफ्तारियां दर्ज कराईं और अंत में राज्यपाल के नाम संबोधित एक ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!