अपनी पुरानी मांगों और नौकरी की सुरक्षा को लेकर रविवार को अवकाश के बावजूद बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक कलेक्टोरेट परिसर में एकत्र हुए। अतिथि शिक्षक समन्वय समिति मध्यप्रदेश के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने महामहिम राज्यपाल के नाम स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।

स्थाई नीति या इच्छामृत्यु का विकल्प

प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार उनके सेवा नियमितीकरण के लिए कोई ठोस नीति तैयार करे। शिक्षकों का कहना था कि यदि उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं होती है, तो उन्हें प्रशासनिक स्तर पर इच्छामृत्यु की अनुमति प्रदान की जाए।

प्रतिनिधियों ने जानकारी दी कि पिछले 18 वर्षों से ये शिक्षक बेहद कम मानदेय पर विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था में अहम भूमिका निभाने वाले ये कर्मी दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में जाकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं, लेकिन सीधी भर्ती और तबादला नीतियों के कारण उनपर हमेशा बेरोजगारी का संकट मंडराता रहता है।

प्रमुख रूप से रखी गईं आठ सूत्रीय मांगें

ज्ञापन के माध्यम से शासन के समक्ष आठ सूत्रीय मांग पत्र प्रस्तुत किया गया है। इसमें प्रमुख रूप से मांग की गई है कि जिन अतिथि शिक्षकों ने सात या उससे अधिक सत्रों में कम से कम एक हजार कार्य दिवस पूरे कर लिए हैं, उन्हें संविदा शिक्षक के पद पर समायोजित किया जाए।

इसके अतिरिक्त पात्रता परीक्षाओं में अर्हता अंकों में छूट देने और सेवाकाल के आधार पर बोनस अंक प्रदान किए जाने की मांग भी उठाई गई है। समिति ने ई-अटेंडेंस का समय सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक निर्धारित करने तथा हर महीने की 10 तारीख तक निश्चित रूप से मानदेय भुगतान किए जाने की गुहार लगाई है।