गुना जिले के राघौगढ़ क्षेत्र में एक ठगी का बड़ा मामला सामने आया है, जहां मकान में रहने वाले एक किरायेदार ने ही दंपती को अपनी साजिश का शिकार बनाया। उत्तर प्रदेश के रहने वाले एक व्यक्ति ने एनजीओ का संचालन शुरू कराने और उसमें विदेशी फंडिंग आने का झांसा दिया और धीरे-धीरे कुल 66 लाख रुपए की धोखाधड़ी कर ली। इस घटना के सामने आने के बाद राघौगढ़ पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी गई है।
साड़ा कॉलोनी में ऐसे बुना ठगी का जाल
राघौगढ़ की साड़ा कॉलोनी के रहने वाले राणा प्रताप सिंह ने थाने में इस संबंध में लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में बताया गया कि उत्तर प्रदेश निवासी प्रमोद सिंह पुत्र जनार्दन सिंह साल 2022 में राणा प्रताप के मकान में किरायेदार के तौर पर रहने आया था। इसके बाद उसने धीरे-धीरे भरोसे में लेकर एनजीओ बनवाने का प्रस्ताव रखा और कहा कि इसमें एससी-एसटी वर्ग के आठ लोगों का होना अनिवार्य है।
आरोपी प्रमोद ने राणा प्रताप के होटल पर काम करने वाले कर्मचारियों लक्ष्मण बंजारा, फूल सिंह बंजारा, मांगी बाई जाटव, धापो बाई जाटव, दिनेश स्वीपर, दीपक प्रजापति और मुकेश बंजारा को अपने जाल में फंसाया। उसने सभी से एनजीओ के नाम पर आधार कार्ड ले लिए और वादा किया कि बाकी सारा काम वह खुद संभाल लेगा। कर्मचारियों को यह लालच दिया गया कि उन्हें हर महीने पांच-पांच हजार रुपए और साल में 50 हजार रुपए मिलेंगे।
फर्जी खाते और दस्तावेजों का खेल
कर्मचारियों को बहला-फुसलाकर आरोपी ने उनके पैन कार्ड बनवाए, बैंक खाते खुलवाए, एटीएम कार्ड और चेक बुक हासिल किए, साथ ही सभी के नाम से अलग-अलग मोबाइल सिम भी ले लीं। प्रमोद एनजीओ चलाने के नाम पर राणा प्रताप से उनके होटल के कर्मचारियों के बैंक खातों में थोड़ी-थोड़ी राशि ट्रांसफर करवाता रहा।
पुलिस को दी गई जानकारी के मुताबिक, 13 अप्रैल 2022 से 1 जुलाई 2024 के बीच प्रमोद ने राणा प्रताप और उनकी पत्नी कुसुम सिंह के खातों से करीब 45 लाख रुपए अन्य कर्मचारियों के खातों में डलवाए और बाद में उन रुपयों को खुद निकाल लिया। इसके अलावा एनजीओ के नाम पर वह राणा प्रताप से नकद करीब 21 लाख रुपए भी ले चुका था।
स्टाम्प और फर्जी चेक देकर देता रहा झांसा
ठगी का दायरा यहीं नहीं रुका, बल्कि आरोपी ने राणा प्रताप से गुजरात कॉरपोरेशन में फॉरेन फंडिंग एनजीओ के नाम पर लाखों रुपए के स्टाम्प भी बनवाए, जिसका भुगतान भी राणा प्रताप ने ही किया था। भरोसे में रखने के लिए प्रमोद ने राणा को यस बैंक के 20-20 लाख रुपए के कुल 20 चेक दिए, जिनमें 10 चेक राणा प्रताप और 10 चेक कुसुम सिंह के नाम थे। आरोपी ने कहा था कि फरवरी 2024 के आखिर में वे उसके खाते से पैसे निकाल लें क्योंकि तब तक विदेशी फंड आ जाएगा।
प्रमोद लगातार यह आश्वासन देता रहा कि गुजरात कॉरपोरेट कंपनी उन्हें एनजीओ चलाने के वास्ते भारी लोन देगी, जबकि इन सभी खातों का संचालन खुद वही कर रहा था। इस तरह कर्मचारियों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर और विदेशी फंडिंग का झूठा सपना दिखाकर कुल 66 लाख रुपए की ठगी को अंजाम दिया गया। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर आरोपी प्रमोद के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!