दतिया जिले के सलैया पमार गांव में एक साल की अतिकुपोषित बच्ची नीलू आदिवासी के निधन के बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आ गया है। इस घटना के बाद प्रशासन ने यह तय किया है कि अब गांव के बच्चों को इलाज के लिए बार-बार जिला मुख्यालय स्थित एनआरसी नहीं दौड़ना पड़ेगा। इसके लिए स्थानीय स्तर पर ही पुख्ता प्रबंध किए जा रहे हैं।
आंगनबाड़ी केंद्र में विकसित होगी मिनी-एनआरसी जैसी सुविधा
घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े और एसडीएम सोनाली राजपूत समेत स्वास्थ्य एवं प्रशासन के तमाम वरिष्ठ अधिकारी सलैया पमार गांव पहुंचे। अधिकारियों ने वहां पहुंचकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान आंगनबाड़ी केंद्र के नए भवन का निरीक्षण कर वहां मिलने वाली सुविधाओं की समीक्षा की गई।
बिजली, पानी और भोजन की व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान आंगनबाड़ी भवन में बिजली और पेयजल की व्यवस्था में खामियां पाई गईं। इसे गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने बाल विकास परियोजना अधिकारी को तुरंत इन्वर्टर लगवाने के निर्देश दिए। वहीं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बीके वर्मा को बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन और शुद्ध पेयजल के वास्ते आरओ लगवाने के आदेश दिए गए। इसके अलावा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के इंजीनियर को बोरिंग कराने की बात कही गई ताकि पानी की समस्या हमेशा के लिए हल हो सके।
सात दिन में दस्तावेज पूरे करने और डिलीवरी प्वाइंट बनाने की तैयारी
गांव के शिक्षकों और गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रशासनिक अधिकारियों को बताया कि कई बच्चों की समग्र आईडी अब तक नहीं बन पाई है। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए पंचायत सचिव को विशेष कैंप लगाकर एक सप्ताह के भीतर सभी बच्चों की समग्र आईडी और आधार कार्ड तैयार करने के निर्देश दिए गए। साथ ही चेतावनी दी गई कि तय समय में काम पूरा न होने पर लापरवाह कर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। इसके अलावा गांव की गर्भवती महिलाओं की सुविधा के लिए स्थानीय स्तर पर ही एक डिलीवरी प्वाइंट शुरू करने की दिशा में भी काम शुरू कर दिया गया है ताकि प्रसव के समय उन्हें दूर न जाना पड़े।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!