दतिया के स्थानीय न्यायालय ने दो साल से अधिक पुराने मारपीट के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला दिया है। अदालत ने शासकीय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के पूर्व खेल अधिकारी मुकेश सिंह गुर्जर और उनके 80 वर्षीय पिता रामनाथ सिंह गुर्जर को दोषी ठहराया है।

प्लॉट के विवाद से जुड़ा है पूरा मामला

यह पूरा घटनाक्रम 2 जनवरी 2023 का है, जो न्यू हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी से जुड़ा हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित प्रदीप सिंह गुर्जर और मुकेश सिंह गुर्जर के प्लॉट आमने-सामने स्थित हैं और दोनों पक्षों के बीच जमीन को लेकर लंबे वक्त से रंजिश चली आ रही थी।

घटना वाले दिन सुबह करीब साढ़े सात बजे प्रदीप सिंह अपने प्लॉट पर मौजूद थे। इसी दौरान मुकेश सिंह गुर्जर और उनके बुजुर्ग पिता रामनाथ सिंह वहां आ धमके और बेवजह गाली-गलौज शुरू कर दी।

लाठी से हमला कर किया था घायल

जब पीड़ित पक्ष की ओर से धीरज सिंह ने गालियां देने का विरोध किया, तो बात बढ़ गई। आरोप है कि पूर्व खेल अधिकारी मुकेश सिंह ने लाठी से हमला कर दिया, जिससे प्रदीप के सिर पर गंभीर चोट आई और खून बहने लगा। वहीं, रामनाथ सिंह ने भी लाठी से वार कर प्रदीप के पैर को जख्मी कर दिया था।

मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर पिता-पुत्र दोनों को दोषी करार दिया। न्यायालय ने दोनों को तीन-तीन महीने के कारावास की सजा सुनाई है।

जुर्माना और मुआवजे का भी आदेश

सजा के साथ-साथ दोनों दोषियों पर एक-एक हजार रुपए का आर्थिक दंड भी लगाया गया है। अदालत के निर्देशानुसार, यदि वे जुर्माना राशि अदा नहीं करते हैं, तो उन्हें एक महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस प्रकार की हिंसक घटनाएं समाज में असुरक्षा का माहौल पैदा करती हैं और इनसे कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है। साथ ही, कुल वसूले गए जुर्माने में से एक हजार रुपए पीड़ित प्रदीप सिंह को बतौर मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया गया है।