दतिया जिले में राजस्व अदालतों में मुकदमों के समय पर फैसले न होने और न्यायिक व्यवस्था के चरमराने से नाराज वकीलों ने गुरुवार को मोर्चा खोल दिया। जिला अभिभाषक संघ के तमाम पदाधिकारी और स्थानीय अधिवक्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपकर राजस्व न्यायालयों के कामकाज में सुधार लाने और लंबित मामलों का त्वरित निपटारा करने की पुरजोर मांग की गई।

एसडीओ कोर्ट में दो सौ मामले अंतिम आदेश के इंतजार में

अभिभाषक संघ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में मुख्य रूप से यह मुद्दा उठाया गया कि एसडीओ न्यायालय दतिया में इस समय लगभग 200 प्रकरण केवल अंतिम आदेश के लिए अटके हुए हैं। वकीलों का आरोप है कि कई मुकदमों में पहली आदेश पत्रिका और नई अपीलों पर पीठासीन अधिकारी के हस्ताक्षर न होने की वजह से फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। इसके अलावा, रिकॉर्ड सुधार से जुड़े मामलों में जांच रिपोर्ट आने के बावजूद समय पर आदेश पारित नहीं किए जा रहे हैं।

कर्मचारियों की अन्य ड्यूटी से अदालती कामकाज ठप

वकीलों ने यह भी बताया कि राजस्व अदालतों में पदस्थ कर्मचारियों की ड्यूटियां चुनाव और अन्य गैर-न्यायिक कार्यों में लगा दी जाती हैं, जिसका सीधा असर अदालती कामकाज पर पड़ रहा है। समय पर दस्तावेजों की नकल न मिलना, नए मामलों को रजिस्टर्ड करने में अनावश्यक देरी होना और तय समय-सीमा में सुनवाई न होने के कारण आम फरियादी बेहद परेशान हो रहे हैं।

इसके अतिरिक्त, राजस्व दस्तावेजों से किसानों और काश्तकारों के नाम हटाए जाने का गंभीर मामला भी उठाया गया। वकीलों का कहना है कि ऐसे रिकॉर्ड सुधार से जुड़े प्रकरण भी लंबे समय से धूल फांक रहे हैं, जिससे किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। संघ ने प्रशासन से इन सभी मामलों में प्राथमिकता के आधार पर एक्शन लेने की बात कही है।

सुधार न होने पर न्यायिक कार्य के बहिष्कार की चेतावनी

यदि जल्द ही राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं लाया गया, तो अभिभाषक संघ सभी राजस्व न्यायालयों के बहिष्कार का कड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर होगा।

प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्था नहीं सुधरी तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। हालांकि, फिलहाल कलेक्टर ने वकीलों के प्रतिनिधिमंडल को उनकी सभी समस्याओं का समयबद्ध निराकरण किए जाने का भरोसा दिलाया है।