दतिया स्थित शासकीय मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी सदस्यों के विदेश दौरों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार कॉलेज के छह प्रोफेसरों द्वारा विदेश यात्राएं किए जाने की बात सामने आई है। इस खुलासे के बाद से स्थानीय चिकित्सा हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

आरटीआई से सामने आए 148 पन्नों के दस्तावेज

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस मामले का खुलासा सूचना के अधिकार यानी आरटीआई के तहत निकाली गई 148 पन्नों की जानकारी से हुआ है। रिकॉर्ड के विश्लेषण से पता चलता है कि कॉलेज के छह प्रोफेसरों ने विदेश यात्राएं की हैं, लेकिन इन दौरों के लिए सक्षम प्राधिकारी की तरफ से दी गई अनुमति या मंजूरी का कोई पत्र रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है।

कार्रवाई में भेदभाव का लगाया गया आरोप

विवाद की शुरुआत तब हुई जब मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. हेमंत कुमार जैन की विदेश यात्रा के मामले में प्रशासन ने जांच शुरू की। डॉ. जैन ने इस मामले में कॉलेज के अधिष्ठाता (डीन) और मुख्य कार्यपालन अधिकारी को एक आधिकारिक आवेदन सौंपा है। उनकी इस शिकायत की प्रति कमिश्नर, चिकित्सा शिक्षा विभाग भोपाल और स्वशासी समिति के अध्यक्ष को भी भेजी गई है।

डॉ. जैन ने अपने आवेदन में प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि नियम सभी शासकीय कर्मचारियों पर एक समान रूप से लागू होने चाहिए। उन्होंने बताया कि उनके अपने मामले में प्रशासन द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में उन्होंने पूरा सहयोग किया था, लेकिन जब उन्होंने अन्य संकाय सदस्यों की विदेश यात्राओं का रिकॉर्ड खंगाला तो स्थितियां अलग पाई गईं।

सभी मामलों की उच्च स्तरीय जांच की मांग

सरकारी कर्मचारियों के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार विदेश यात्रा पर जाने से पहले विभागीय अनुमति लेना अनिवार्य होता है। बिना अनुमति के विदेश जाने पर नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

शिकायतकर्ता प्रोफेसर का तर्क है कि यदि उनके मामले में जांच की गई है और कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई गई है, तो समान परिस्थितियों वाले अन्य डॉक्टरों के विदेश दौरों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने इस प्रकरण में दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए सभी संबंधित मामलों की नए सिरे से जांच कराने की पुरजोर मांग की है।