अंचल के दतिया जिले में सावन तीज का पर्व शनिवार को पूरे उत्साह और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शहर के प्रमुख मंदिरों के साथ-साथ श्रद्धालुओं ने अपने घरों में भी भगवान के लिए मनमोहक झूले सजाए और आराध्य को झूला झुलाया।

श्री बिहारी जी मंदिर में सजा विशेष झूला

शहर के प्रसिद्ध श्री बिहारी जी मंदिर में परंपरा के अनुसार खास आयोजन किया गया। यहां हर साल की भांति इस बार भी अशोक, कनेर, आम, जामुन और खिन्नी के पत्तों का उपयोग कर आकर्षक झूला तैयार किया गया था। उत्सव के दौरान भगवान बिहारी जी अपने गर्भगृह से बाहर आकर इस सुंदर झूले में प्रिया जी (राधा रानी) के साथ विराजमान हुए।

वर्ष में छह बार होते हैं विशेष श्वेत वस्त्रों में दर्शन

मंदिर के महंत पंडित नमन गोस्वामी ने जानकारी देते हुए बताया कि सावन तीज के पावन अवसर पर शयन आरती के वक्त भगवान बिहारी जी धोती-लंगोटी के रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। उन्होंने बताया कि सफेद वस्त्रों में भगवान के यह विशिष्ट दर्शन सालभर में केवल छह मौकों पर ही प्राप्त होते हैं, जिनमें सावन तीज, सावन ग्यारस, सावन पूर्णिमा, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, शरद पूर्णिमा और गोपाष्टमी शामिल हैं। साल के बाकी दिनों में बिहारी जी राजश्री पोशाक में ही भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।

लाला के ताल पर लगा पारंपरिक मेला

सावन तीज के पावन पर्व पर लाला के ताल समेत स्थानीय विभिन्न मंदिरों में कई धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। हर वर्ष की भांति इस बार भी लाला के ताल पर भव्य मेला आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने मंदिर में माथा टेककर पूजा-अर्चना की।

मेला परिसर में पारंपरिक कुश्ती प्रतियोगिताओं के अलावा अन्य कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। मेले में बच्चों और बड़ों के लिए झूलों, खान-पान की स्टालों और मनोरंजन के पुख्ता इंतजाम रहे। सुबह से लेकर देर शाम तक मंदिर परिसर और मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।