अंचल में रविवार दोपहर के बाद मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया और बादलों ने शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक पानी बरसाना शुरू कर दिया। दिनभर कभी तेज तो कभी रिमझिम फुहारों का दौर चलता रहा, जिससे पूरे क्षेत्र में ठंडक घुल गई। मौसम विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक सुबह साढ़े आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक कुल 44.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
तापमान में गिरावट और उमस से मिली राहत
इस मानसूनी गतिविधि के चलते तापमान में भी खासी गिरावट दर्ज की गई। जिले का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। हवा में नमी का स्तर काफी अधिक रहा, जिसमें सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता 92 प्रतिशत और शाम के वक्त बढ़कर 98 प्रतिशत तक पहुंच गई।
लगातार हुई इस मानसूनी बारिश के कारण आमजन को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिली है। हालांकि, रुक-रुक कर हुई वर्षा की वजह से शहर की सड़कों पर पानी भर गया और वाहनों की आवाजाही की गति धीमी पड़ गई, जिसका असर बाजार की रौनक पर भी देखने को मिला।
धान और दलहनी फसलों के लिए वरदान बनी वर्षा
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह पानी किसानों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. विश्वनाथ कंसाना ने जानकारी दी कि धान की रोपाई का कार्य पहले ही पूरा हो चुका है। ऐसे महत्वपूर्ण समय पर बरसे पानी से खेतों में नमी बनी रहेगी, जिससे धान की फसल को भरपूर लाभ मिलेगा क्योंकि इस फसल को अधिक पानी की आवश्यकता होती है।
वैज्ञानिक ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मौसमी बरसात उड़द, मूंग और मूंगफली जैसी अन्य खरीफ फसलों के लिए भी काफी गुणकारी है। इन फसलों को भी इस अवस्था में नमी की जरूरत होती है। बारिश होने से किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए बिजली के पंप नहीं चलाने पड़ेंगे, जिससे उनके खर्च और बिजली दोनों की बचत होगी।
तिल की फसल को लेकर किसानों के लिए चेतावनी
खेत में पानी भरने से फसल को नुकसान हो सकता है। जलभराव होने पर तिली के उत्पादन में 10% तक कमी आ सकती है। इसलिए ऐसे खेतों से पानी की निकासी जरूरी है। - डॉ. विश्वनाथ कंसाना, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसानों को तिल की खेती को लेकर खास सतर्कता बरतनी होगी। यदि खेतों में अधिक पानी जमा होता है, तो फसल को हानि उठानी पड़ सकती है और पैदावार में दस फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। इसलिए जिन खेतों में पानी भर रहा है, वहां से तुरंत जल निकासी का इंतजाम करना चाहिए।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!