दतिया जिले के भाण्डेर में लगभग दो साल पहले हुए भगवान सिंह यादव हत्याकांड में जिला अदालत ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। तृतीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेश भंडारी की अदालत ने इस मामले के तीनों आरोपियों को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर अर्थदंड भी लगाया है।

घटना का विस्तृत विवरण

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 10 मई 2024 की सुबह घटी थी, जब मृतक भगवान सिंह यादव चिरगांव चुंगी स्थित आशीष रजक की आटा चक्की पर आटा लेने पहुंचे थे। इसी दौरान आशीष रजक, अशोक रजक उर्फ बृजवंशी रजक और अरविंद उर्फ अर्रु रजक नामक तीनों भाइयों से उनका किसी बात को लेकर विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि आरोपियों ने भगवान सिंह पर हमला कर दिया।

आरोप है कि अशोक और अरविंद ने लकड़ी के डंडों से भगवान सिंह के साथ मारपीट की, जबकि मुख्य आरोपी आशीष ने चक्की पर रखा लगभग 20 किलोग्राम वजनी लोहे का बांट उठाकर उनके सिर पर दे मारा। इस गंभीर चोट के कारण भगवान सिंह को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

घटना के बाद मृतक के भाई दिनेश कुमार यादव ने भाण्डेर थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया। जांच के उपरांत, पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में चालान पेश किया था।

अदालत का फैसला और तर्क

मामले की सुनवाई के दौरान, अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर गौर किया। अतिरिक्त लोक अभियोजक मुकेश गुप्ता ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी की। सभी तथ्यों और सबूतों के आधार पर, अदालत ने तीनों भाइयों आशीष रजक, अशोक रजक उर्फ बृजवंशी रजक और अरविंद उर्फ अर्रु रजक, जो काजीपाठा मोहल्ला, भाण्डेर के निवासी हैं, को हत्या का दोषी पाया।

अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि दिनदहाड़े की गई यह हत्या एक गंभीर प्रकृति का अपराध है, जिसने क्षेत्र में भय का माहौल पैदा कर दिया था। इसलिए, आरोपियों को कठोरतम दंड दिया जाना न्यायोचित है। इसी आधार पर तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।