दतिया उपचुनाव के लिए भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के नामांकन के अवसर पर पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पार्टी से कुछ मांगने नहीं आए हैं, क्योंकि पार्टी ने उन्हें तीस वर्षों तक विधायक और पंद्रह वर्षों तक मंत्री पद देकर पहले ही बहुत सम्मान दिया है।

डॉ. मिश्रा ने संकल्प लिया कि आशुतोष तिवारी की जीत सुनिश्चित करने के लिए वे अपना सर्वस्व न्योछावर कर देंगे। उन्होंने कहा कि वे हर दरवाजे पर शीश नवाएंगे और प्रत्येक गांव में जाकर आशुतोष को विजयी बनाएंगे।

यह घटना सोमवार को हुई जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की उपस्थिति में आशुतोष तिवारी ने कलेक्ट्रेट में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। नामांकन के बाद आयोजित जनसभा में डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए संगठन के प्रति अपनी अटूट निष्ठा का प्रदर्शन किया।

प्रत्याशियों की तुलना और समर्पण

अपने संबोधन में डॉ. मिश्रा ने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को एक 'संत' बताया, जो बचपन से ही राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित रहे हैं। उन्होंने इसकी तुलना कांग्रेस के प्रत्याशी से की, जिन्हें उन्होंने 'राजा' कहा, जो सोने का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं। मिश्रा ने कार्यकर्ताओं के बीच रहने, उनके साथ खाने-पीने और दिन-रात पार्टी की सेवा करने की बात पर जोर दिया।

कांग्रेस के आरोपों का खंडन

डॉ. मिश्रा ने कांग्रेस के उन आरोपों का भी खंडन किया, जिनमें भाजपा में फूट और अहंकार की बात कही जा रही थी। उन्होंने दिग्विजय सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि यदि 7,500 वोटों से हारने वाला अहंकारी है, तो भोपाल में 3.5 लाख वोटों से हारने वाले दिग्विजय सिंह संस्कारी कैसे हो गए? उन्होंने जीतू पटवारी की राऊ में 35,000 वोटों की हार का भी जिक्र किया।

भाजपा में फूट के आरोपों पर उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि उनके प्रत्याशी का नामांकन भरवाने अवधेश नायक और राजेंद्र भारती क्यों नहीं आए। उन्होंने कहा कि भाजपा का हर कार्यकर्ता आशुतोष के लिए एकजुट खड़ा है, जबकि कांग्रेस अपने ही नेताओं की अनुपस्थिति पर ध्यान दे।

दतिया के मतदाताओं से आग्रह

डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने दतिया की जनता से कांग्रेस के भ्रमजाल में न फंसने का आग्रह किया। उन्होंने याद दिलाया कि विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने सरकार बनाने का दावा किया था, जो सच नहीं हुआ, और इससे विकास कार्य बाधित हुए। उन्होंने कहा कि जो बनी-बनाई सरकार नहीं चला पाए, वे नई सरकार कैसे बनाएंगे।