दतिया जिले में कर्मचारियों और अधिकारियों की विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ मुखर हो गया है। सोमवार की शाम करीब पांच बजे संघ के पदाधिकारी और कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को संबोधित ज्ञापन सौंपा।

प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन और महंगाई भत्ता शामिल

संघ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता प्रदान करने की प्रमुख मांग उठाई गई। इसके अलावा, वर्ष 2011 से पहले नियुक्त किए गए शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की बात कही गई। साथ ही, ई-अटेंडेंस के आधार पर कर्मचारियों का वेतन रोके जाने से संबंधित आदेश को तुरंत प्रभाव से वापस लिए जाने की मांग भी रखी गई।

विद्यालयों का समय बदलने और ग्रेज्युटी सीमा बढ़ाने की मांग

कर्मचारी संघ ने प्रशासनिक सुधार के तहत स्कूलों का समय सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित करने का अनुरोध किया है। ज्ञापन में प्रथम पाली में अर्द्धअवकाश लागू किए जाने का प्रावधान जोड़ने की भी मांग की गई है। इसके साथ ही, कर्मचारियों के हित में ग्रेज्युटी की अधिकतम सीमा को बढ़ाकर 25 लाख रुपए करने, लिपिक संवर्ग को मंत्रालय के समकक्ष समयमान वेतनमान देने और दो से अधिक संतान संबंधी बाध्यता को समाप्त करने की बात उठाई गई।

संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण पर जोर

ज्ञापन के माध्यम से दैनिक वेतनभोगी, संविदा, स्थाईकर्मी और आउटसोर्स के रूप में सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को नियमित करने की पुरजोर मांग की गई। संघ ने पंचायत सचिवों का पंचायत विभाग में संविलियन किए जाने और स्थाई कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का लाभ दिए जाने की आवश्यकता जताई। विभिन्न विभागों में चली आ रही वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए नए सिरे से वेतन आयोग के गठन की मांग भी इसमें शामिल है।

स्वास्थ्य विभाग समेत शिक्षा, कृषि, आयुष, महिला एवं बाल विकास, वन और जल संसाधन विभागों से जुड़ी कई अन्य समस्याएं भी ज्ञापन में दर्ज कराई गईं। संघ ने स्वास्थ्य विभाग में एमपीडब्ल्यू और एएनएम के पदोन्नति नियमों में सुधार, संविदा पर्यवेक्षकों के नियमितीकरण, वाहन चालकों की नियमित भर्ती और महकमे में टैक्सी प्रथा पर रोक लगाने की मांग की है। अंत में अनुकंपा नियुक्ति के लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण करने की बात भी प्रमुखता से कही गई।