दतिया जिले के स्थानीय प्रशासन ने राजघाट कॉलोनी में लंबे समय से शासकीय आवासों पर जमे अवैध कब्जाधारियों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की तैयारी पूरी कर ली है। सक्षम प्राधिकारी एवं एसडीएम द्वारा इस संबंध में 15 शासकीय आवासों को खाली कराने के लिए अंतिम बेदखली आदेश जारी किए गए हैं। इन आदेशों के अमल में आने के बाद अब नगर पालिका और पुलिस बल की संयुक्त टीम इन मकानों को कब्ज़ा मुक्त कराएगी।

जांच में सामने आई गंभीर अनियमितताएं

प्रशासन की ओर से की गई छानबीन में यह तथ्य सामने आया कि राजघाट कॉलोनी स्थित कई सरकारी बंगले और मकान कागजों में तो मूल आवंटियों के नाम दर्ज हैं, लेकिन असलियत में वहां अन्य लोग अवैध रूप से निवास कर रहे हैं। इनमें से कई ऐसे मामले भी हैं जहां संबंधित कर्मचारियों का अन्यत्र तबादला हो चुका है या वे सेवानिवृत्ति पा चुके हैं, परंतु उनके द्वारा अब तक शासकीय आवास खाली नहीं किए गए हैं।

नेताओं और अन्य लोगों के नाम आए सामने

जारी किए गए बेदखली आदेशों में कई चौंकाने वाले नाम उजागर हुए हैं। उदाहरण के तौर पर, कॉलोनी के एच-28 नंबर का आवास पूर्व थाना प्रभारी कोतवाली धनेंद्र सिंह भदौरिया के नाम आवंटित था, जिनका तबादला हो चुका है, लेकिन वर्तमान में इस पर भाजपा नेता अनूप यादव का कब्जा बताया गया है। इसी प्रकार, आवास क्रमांक जी-24 पर पूर्व जनपद सदस्य एवं भाजपा नेत्री क्रांति राय के कब्जे की बात आदेश में दर्ज है।

प्रशासन की सूची के मुताबिक, अन्य आवासों में भी इसी तरह के कब्जे हैं। सहायक शिक्षक कल्पना द्विवेदी के नाम आवंटित एनजी-15 आवास पर विमलेश वंशकार, पटवारी विवेक शर्मा के नाम दर्ज एनजी-14 पर बंटी रायकवार, और कृषि विभाग के लेखापाल हीरालाल सिमोलिया (हबीब खान) के एनजी-16 आवास पर हेमू राजा कर्ण का कब्जा है। इसके अलावा जी-5 नंबर मकान, जो सितंबर 2022 से रिक्त घोषित था, उस पर प्रभा राजपूत का कब्जा पाया गया है।

कार्रवाई के दायरे में आए अन्य आवासों में जी-36 पर नगर पालिका कर्मचारी पुष्पेन्द्र परमार (मूल आवंटी उपयंत्री इन्द्रवेश यादव), जी-35 पर मुकेश यादव (मूल आवंटी सहायक शिक्षक सतेन्द्र सिंह तोमर), आई-6 पर मोनू भार्गव (मूल आवंटी स्टाफ नर्स रेनू गोस्वामी), तथा आई-22 नंबर आवास जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत्त चौकीदार कन्हई यादव के कब्जे में पाया गया है। प्रशासन द्वारा अब इन सभी को बलपूर्वक हटाए जाने की कार्रवाई की जाएगी।