औचक निरीक्षण के दौरान खुली पोल

डबरा नगर पालिका परिषद के भीतर चल रहा आपसी खींचतान और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। नगर पालिका के उपाध्यक्ष सत्येंद्र दुबे द्वारा किए गए औचक निरीक्षण के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। निरीक्षण में कार्यालय की कई शाखाओं में ताले लटके मिले और कर्मचारी भी अपनी कुर्सियों से नदारद पाए गए।

उपाध्यक्ष सत्येंद्र दुबे ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने शाम के वक्त नगर पालिका कार्यालय का औचक मुआयना किया था। इस दौरान लोक निर्माण विभाग, जलप्रदाय शाखा, विद्युत विभाग और स्वच्छता से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यालयों के चैंबरों पर ताले जड़े हुए थे तथा संबंधित अमला मौके से पूरी तरह गायब मिला।

सोमवार से धरने की तैयारी और एसडीएम को आवेदन

निरीक्षण के दौरान मिली इस भारी अनियमितता के विरोध में उपाध्यक्ष गुट के पार्षदों ने आगामी सोमवार से धरने पर बैठने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। इस संबंध में प्रशासन को विधिवत सूचित करते हुए एसडीएम कार्यालय में धरने की अनुमति के लिए आवेदन भी सौंप दिया गया है।

उपाध्यक्ष का कहना है कि जब चुनी हुई परिषद के प्रतिनिधियों को ही अधिकारी कार्यालय में नहीं मिलेंगे, तो आम नागरिकों की शिकायतों और समस्याओं का समाधान कैसे संभव हो पाएगा। प्रशासनिक सुस्ती के कारण जनता के बीच जाना भी मुश्किल हो गया है।

सीएमओ की अनुपस्थिति और फाइलों पर रोक के आरोप

सत्येंद्र दुबे ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे पिछले छह दिनों से कार्यालय नहीं आ रही हैं। आवक-जावक विभाग से केवल एक दिन के अवकाश का रिकॉर्ड मिला है, जबकि बाकी दिनों की गैरहाजिरी का कोई आधिकारिक ब्योरा उपलब्ध नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे प्रकरण पर जब सीएमओ साक्षी बाजपेई से संपर्क साधने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन कॉल रिसीव नहीं किया।

इसके अलावा पार्षदों ने नगर पालिका अध्यक्ष पर भी कड़े आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि अध्यक्ष द्वारा शहर के विभिन्न वार्डों में होने वाले विकास कार्यों में लगातार बाधा पहुंचाई जा रही है। विकास से जुड़ी फाइलों पर हस्ताक्षर नहीं किए जा रहे हैं, जिसके चलते जनता के सामने जवाब देना कठिन हो गया है। पूर्व में भी सीएमओ के खिलाफ पार्षद और कर्मचारी धरने पर बैठ चुके हैं, और अब यह विवाद नए मोड़ पर आ गया है।