विकास कार्यों को रोकने का आरोप

डबरा नगर पालिका परिषद के भीतर चल रहा विवाद अब खुलकर सड़क पर आ गया है। नगर पालिका उपाध्यक्ष सहित एक दर्जन से अधिक पार्षद पालिका कार्यालय के मुख्य गेट पर टेंट लगाकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। आंदोलनकारी पार्षदों का सीधा आरोप है कि नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा शहर के विकास कार्यों में लगातार बाधा पहुंचाई जा रही है।

कार्यालय न आने और फाइलें दबाने की शिकायत

धरना प्रदर्शन कर रहे जनप्रतिनिधियों का कहना है कि अध्यक्ष न तो नियमित रूप से नगर पालिका कार्यालय आती हैं और न ही विकास कार्यों से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलों पर हस्ताक्षर कर रही हैं। पार्षदों का यह भी तर्क है कि इसी साल मार्च के महीने में आयोजित परिषद की बैठक में तमाम महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किए गए थे, लेकिन उन प्रस्तावों पर आज तक कोई ठोस अमल नहीं किया गया है। वे मांग कर रहे हैं कि इन रुके हुए कार्यों को गति देने के लिए फौरन एक विशेष सम्मेलन बुलाया जाए।

पानी सप्लाई कंपनी पर वित्तीय अनियमितता के आरोप

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान जलापूर्ति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। पार्षदों ने बताया कि शहर में पानी सप्लाई करने वाली निजी कंपनी को रोजाना 20 एमएलडी पानी की आपूर्ति करनी तय है, लेकिन मौके पर मात्र 12 एमएलडी पानी ही मिल रहा है। इसके बावजूद नगर पालिका की तरफ से उस कंपनी को पूरे अनुबंध का भुगतान किया जा रहा है, जिसे लेकर पार्षदों में भारी नाराजगी है और उन्होंने कंपनी पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा धरना

नाराज पार्षदों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका यह आंदोलन जारी रहेगा। इस अनिश्चितकालीन धरने में उपाध्यक्ष सत्येंद्र दुबे के साथ ही पार्षद सुनीता राजोरिया, वर्षा पंडा, नारायणी देवी, हीरा सरदार, सुमित साहू, विक्रम वीर दुबे, नरेश पलिया, लवलेश कैन, जयेंद्र गुर्जर, सरदार सिंह कुशवाहा, मनोज रावत और सुदर्शन रावत प्रमुख रूप से शामिल रहे।