पैसे के विवाद में हुआ खूनी संघर्ष

ग्वालियर जिले के डबरा उपखंड के अंतर्गत आने वाले पिछोर कस्बे में पैसों के लेनदेन को लेकर दो पक्षों के बीच जमकर विवाद हुआ। वार्ड नंबर 3 के रहने वाले हरीराम आदिवासी के घर के बाहर कुछ लोग लाठी-डंडों से लैस होकर पहुंचे और हंगामा करने लगे।

पीड़ित हरीराम के अनुसार, रवि, लखन, राजा, सूरज, मिथिलेश, अन्नू और भूरी नामक लोग उनके घर के बाहर खड़े होकर गालियां दे रहे थे। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने उन पर लाठी-डंडों से हमला बोल दिया।

गर्भवती बेटी को भी नहीं बख्शा

इस अचानक हुए हमले में हरीराम की दोनों बेटियां राजो और रोशनी गंभीर रूप से घायल हो गईं। इनमें से रोशनी गर्भवती है और उसे इस मारपीट में काफी चोटें आई हैं। परिवार वालों ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने किसी की लिहाज किए बिना महिलाओं पर भी डंडे बरसाए।

घटना के तुरंत बाद पीड़ित पक्ष न्याय की उम्मीद में पिछोर थाने पहुंचा, लेकिन उनका आरोप है कि वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने उनकी बात नहीं सुनी और बिना कोई रिपोर्ट दर्ज किए उन्हें थाने से भगा दिया।

डबरा सिटी थाने के बाहर किया हंगामा

पिछोर पुलिस से मदद न मिलने पर आक्रोशित परिजन गंभीर हालत में दोनों युवतियों को लेकर सीधे डबरा सिटी थाने पहुंच गए। उन्होंने घायलों को थाने के बाहर जमीन पर लिटाकर विरोध प्रदर्शन और हंगामा शुरू कर दिया।

हंगामा बढ़ता देख डबरा सिटी थाना प्रभारी संजय शर्मा तुरंत बाहर आए। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया और घायलों को तत्काल डबरा सिविल अस्पताल भिजवाया। साथ ही, उन्होंने पिछोर थाने के अधिकारियों को भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।

पुलिस ने दी अपनी सफाई

दूसरी ओर, पिछोर थाना प्रभारी शिवम राजावत ने अपने ऊपर लगे लापरवाही के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि पैसों के विवाद के चलते दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई थी और दोनों तरफ के लोग घायल हुए हैं।

थाना प्रभारी ने सफाई दी कि पुलिस ने घायलों को पहले ही मेडिकल परीक्षण के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, लेकिन वे खुद ही डबरा चले गए। फिलहाल, पुलिस ने घायलों का मेडिकल करा लिया है और प्राप्त बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।