स्थानीय पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए नकली नोट के मामले में पिछले बीस साल से फरार चल रहे सीमा सुरक्षा बल (BSF) के एक आरक्षक को दबोच लिया है। पुलिस को काफी समय से इस शख्स की तलाश थी और इसकी गिरफ्तारी पर पांच हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था।

वर्ष 2004 में सामने आया था जाली करेंसी का मामला

पकड़े गए आरोपी की शिनाख्त अरविंद पुत्र बहादुर सिंह जाट के रूप में हुई है, जो मूल रूप से पिछोर थाना क्षेत्र के ग्राम चुराली का रहने वाला है। घटना के वक्त वह बीएसएफ टेकनपुर की 78वीं बटालियन में अपनी सेवाएं दे रहा था। वर्ष 2004 में उसके पास से नकली नोट बरामद किए गए थे, जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था। पूछताछ के दौरान उसकी निशानदेही पर पुलिस ने नकली नोट छापने में इस्तेमाल होने वाली मशीन और भारी मात्रा में जाली मुद्रा भी जब्त की थी। इस प्रकरण में अन्य लोगों को भी सह-आरोपी बनाया गया था।

सजा के बाद जेल से फरार होकर फरीदाबाद में बसा

अदालत ने इस मामले में अरविंद को तीन साल कैद की सजा सुनाई थी। वह लगभग एक साल तक सलाखों के पीछे रहने के बाद फरार हो गया था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, लंबी फरारी के दौरान वह हरियाणा के फरीदाबाद जिले की बल्लभगढ़ तहसील में रहने लगा था। वहीं पर उसने दूसरा जीवन शुरू किया, शादी की और उसका एक सोलह साल का बेटा भी है।

हाईकोर्ट की सख्ती और रिश्तेदारों से मिला सुराग

हाल ही में उच्च न्यायालय ने इस पुराने मामले पर संज्ञान लेते हुए पुलिस से अब तक की गई जांच और प्रगति की रिपोर्ट तलब की थी। अदालत ने पूछा था कि दो दशक से फरार चल रहे व्यक्ति को पकड़ने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। इसके बाद पुलिस अधीक्षक धर्मवीर यादव ने डबरा सिटी थाना प्रभारी संजय शर्मा को विशेष निर्देश दिए। पुलिस ने अपने मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया और रिश्तेदारों के माध्यम से सूचना मिली कि अरविंद डबरा आने वाला है।

मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर पुलिस दल ने डबरा रेलवे स्टेशन पर घेराबंदी की। जैसे ही आरोपी ट्रेन से उतरकर स्टेशन पर आया, पुलिस ने उसे दबोच लिया। इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी संजय शर्मा के साथ प्रधान आरक्षक संजीव यादव, शिवशांत पांडे, विनोद रावत और आरक्षक बंटी पुरी तथा उदय सूरज की अहम भूमिका रही।