भिंड जिले के सुरपुरा थाना क्षेत्र से जुड़े चर्चित दुष्कर्म मामले में अदालत ने सह आरोपी को बड़ा झटका दिया है। न्यायालय ने मामले की गंभीरता और पत्रावलियों पर उपलब्ध साक्ष्यों को आधार बनाते हुए सह आरोपी विवेक कुमार यादव की नियमित जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।

क्या है पूरा मामला

घटना 15 जुलाई 2026 की है। पीड़ित युवती ने सुरपुरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह दोपहर करीब 2 बजे सुरपुरा स्थित हनुमान मंदिर के पास अपनी बुआ के घर नावली जाने के लिए ऑटो का इंतजार कर रही थी। उसी समय सुमित यादव और एक अन्य युवक सफेद रंग की कार से वहां पहुंचे और उसे नावली छोड़ने की बात कही। पीड़िता उनकी बात पर विश्वास कर कार में बैठ गई।

शिकायत के अनुसार आरोपी दोनों युवकों उसे कार से अटेर किले तक ले गए, जहां मुख्य आरोपी सुमित ने उसके साथ गलत काम किया। इसके बाद आरोपी उसे वापस सुरपुरा की तरफ लाए और परा तिराहे के पास कार से नीचे उतार दिया। नीचे उतरने के दौरान पीड़िता के पैर में चोट भी आई थी, जिसके बाद उसने घर पहुंचकर परिजनों को पूरी घटना बताई।

पुलिस कार्रवाई और जब्ती

मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64(1), 70(1) और 351(3) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। पुलिस ने सह आरोपी विवेक कुमार को 18 जुलाई को गिरफ्तार किया था और अगले दिन 19 जुलाई को अदालत में पेश करने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

जांच के दौरान पुलिस ने अपराध में प्रयुक्त सफेद मारुति सुजुकी कार (क्रमांक एमपी-07-एई-1372) को भी जब्त कर लिया था। वाहन के मालिक ने पुलिस को दिए बयान में पुष्टि की थी कि 15 जुलाई की सुबह विवेक ही इस कार को लेकर गया था।

अदालत में वकीलों की दलीलें

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि विवेक पूरी तरह निर्दोष है और उसे इस मामले में साजिश के तहत फंसाया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि उसके खिलाफ पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

वहीं, अभियोजन पक्ष और फरियादिया के अधिवक्ता हिमांशु शर्मा ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने लिखित आपत्ति पेश कर कोर्ट को बताया कि आरोपी ने मुख्य आरोपी के साथ मिलकर पीड़िता को वाहन से ले जाने और छोड़ने में सहयोग किया था। आशंका जताई गई कि जमानत मिलने पर वह गवाहों और साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है।

दोनों पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने माना कि इस मामले में विवेचना पूरी हो चुकी है और चालान पेश किया जा चुका है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्ट्या ऐसा प्रतीत नहीं होता कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है। अपराध की प्रकृति गंभीर होने और आजीवन कारावास तक के प्रावधान को देखते हुए न्यायालय ने विवेक कुमार यादव की ओर से प्रस्तुत पहली नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया।