भिंड के प्रथम अपर सत्र न्यायालय ने फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार करने के एक गंभीर मामले में पूर्व तहसीलदार मोहनलाल शर्मा और अन्य आरोपियों को तगड़ा झटका दिया है। अदालत ने आरोपियों की ओर से दायर की गई सभी निगरानी याचिकाओं को एक सिरे से खारिज कर दिया है।
रेप आरोपी को बचाने का है गंभीर आरोप
यह पूरा प्रकरण मुंबई में दर्ज एक दुष्कर्म के मामले के आरोपी विमल यादव को कानूनी कार्रवाई से सुरक्षित बचाने के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाने से जुड़ा है। आरोप है कि इस अवैध कृत्य को अंजाम देने के लिए सरकारी दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स में गंभीर हेरफेर की गई थी।
इन सात लोगों पर दर्ज है एफआईआर का आदेश
अदालत के निर्देश पर जिन सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, उनमें तत्कालीन नायब तहसीलदार मोहनलाल शर्मा, पटवारी संजीव शर्मा, सचिव शेरसिंह यादव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रजनी जादौन, विमल यादव, आशुतोष सिंह यादव और राजकुमार दुबे शामिल हैं। सीजेएम कोर्ट ने इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करने के आदेश दिए थे।
निचली अदालत के इस आदेश के खिलाफ पूर्व नायब तहसीलदार मोहनलाल शर्मा सहित चार आरोपियों ने प्रथम अपर सत्र न्यायालय में निगरानी याचिकाएं दाखिल की थीं, ताकि उन्हें कानूनी कार्रवाई से राहत मिल सके।
पुलिस अब दस्तावेजों की गहराई से करेगी जांच
सोमवार को हुई सुनवाई के बाद अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि आरोपियों को कोई राहत नहीं मिलेगी और उनकी सभी चारों याचिकाएं खारिज कर दी गईं। इसके चलते अब आरोपियों पर दर्ज एफआईआर और कानूनी शिकंजा पूरी तरह बरकरार है।
अदालत के इस फैसले के बाद स्थानीय पुलिस अब मामले में आगे की विस्तृत जांच को गति देगी। जांच के दौरान इस बात की तह तक जाया जाएगा कि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार करने में किस-किस अधिकारी और कर्मचारी की क्या भूमिका रही है तथा मुंबई के मामले में इसका उपयोग कैसे किया गया था।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!