भिंड जिले में समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीदी को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. गोविंद सिंह ने इस पूरी प्रक्रिया में करोड़ों रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाते हुए भाजपा नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया है कि इस बड़े खेल में नेताओं और अफसरों की मिलीभगत है।
उत्तर प्रदेश से गेहूं लाकर भिंड में बेचने का आरोप
बायपास रोड स्थित टिकसरा में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में डॉ. गोविंद सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश से बड़ी मात्रा में गेहूं भिंड लाया गया। इस गेहूं को भिंड जिले के किसानों के नाम पर फर्जी पंजीयन के जरिए समर्थन मूल्य पर खरीदा गया। उनके अनुसार, इस अनियमितता के कारण सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है, वहीं वास्तविक किसानों को उनके हक से वंचित होना पड़ा है।
डॉ. सिंह ने जोर देकर कहा कि यह पूरी प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से की गई, जिसमें स्थानीय किसानों के अधिकारों का हनन हुआ। उन्होंने कहा कि फर्जीवाड़े के इस खेल में उन किसानों को लाभ पहुंचाया गया, जो वास्तव में गेहूं के उत्पादक नहीं थे, जबकि मेहनतकश किसानों को अपनी उपज बेचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक मिलीभगत के बिना संभव नहीं
पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि इतना बड़ा कथित घोटाला बिना राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत के संभव नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारियों ने राजनीतिक दबाव में आकर काम किया, जिसके चलते अब तक इस मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
डॉ. गोविंद सिंह ने यह भी कहा कि यदि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे मामले सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और किसानों के भरोसे को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
कलेक्टर से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
डॉ. सिंह ने भिंड कलेक्टर से इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी पद पर हो, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि समर्थन मूल्य व्यवस्था किसानों के हितों की रक्षा के लिए बनाई गई है, और यदि इसमें अनियमितताएं होती हैं, तो सबसे अधिक नुकसान वास्तविक किसानों को ही उठाना पड़ता है। इसलिए, इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को जल्द से जल्द कानून के दायरे में लाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में भी ऐसी अनियमितताओं को बढ़ावा मिलेगा।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!